पांच देशों ने किया भारत की NSG सदस्यता का विरोध

प्रभाकर मिश्र, नई दिल्ली (23 जून): न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत की सदस्यता के मुद्दे पर दक्षिण कोरिया के सियोल में एक अहम बैठक हुई। जिसमें पांच देशों ने भारत की सदस्यता का विरोध किया। कल फिर एनएसजी के सदस्य देश बातचीत की मेज पर बैठेंगे। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। मोदी ने चीन से NSG की सदस्यता के मुद्दे पर समर्थन मांगा। 

दक्षिण कोरिया के सियोल में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप के सदस्य जब मिले तो भारत को बड़ी उम्मीद थी। हिंदुस्तान के साथ पहले से ही अमेरिका खड़ा था। यूरोप की भी बड़ी ताकतें हिंदुस्तान के साथ खड़ी थी। लेकिन, जब भारत की NSG में एंट्री के मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई तो न्यूजीलैंड, ब्राजील, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और टर्की ने विरोध किया। मतलब, हिंदुस्तान की राह में सिर्फ चीन ही दीवार नहीं है। अब पांच और देश खड़े हो गए। हालांकि, सियोल में कल फिर NSG के सदस्य देश बैठेंगे और भारत की सदस्यता के मुद्दे पर चर्चा होगी। 

इससे पहले सियोल से करीब 5 हजार किलोमीटर दूर ताशकंद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NSG में भारत की एंट्री के लिए बड़ी कोशिश की। ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग मिले। दोनों के बीच करीब 45 से 50 मिनट की मुलाकात हुई। माना जा रहा है कि इस मुलाकात से चीन के रवैये में जरुर बदलाव आया होगा। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने ताशकंद की जमीन से हिंदुस्तान के पक्ष में माहौल बनाने की पूरजोर कोशिश की। 

48 देशों वाले NSG में भारत को अमेरिका सहित कई बड़ी ताकतों का समर्थन हासिल है। लेकिन, चीन हमेशा दीवार की तरह खड़ा रहा है। चीन हमेशा कहता रहा है कि वो नियमों के आधार पर आगे बढ़ेगा और भारत की सदस्यता को लेकर उसका रवैया रचनात्मक रहेगा। चीन चाहता है कि NSG में भारत के साथ पाकिस्तान की एंट्री हो। लेकिन, चीन के पांच और देशों के विरोध से सियोल में भारत की राह मुश्किल हो गयी है।