भारत में हर साल 4 लाख किडनी डोनर्स की जरूरत, पढ़िए... किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी कहानी

नई दिल्ली (4 जून): मरने के बाद जिस प्रकार शरीर सारे गहने उतार कर उसे कहीं और प्रयोग कर लिया जाता है लेकिन वहीं नश्वर शरीर के ब्रेन डेड होने की स्थिति में हम लोग अंगदान करने में हिचक क्यों करते हैं। ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान करने से सात लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।  

हर साल चार लाख किडनी डोनर की जरूरत भारत में 20 लाख से अधिक लोग किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। इसमें हर साल 4 लाख मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। इसके लिए देश में हर साल 4 लाख किडनी दान करने वालों की जरूरत है। लेकिन भारत में हर साल 7000 से 8000 हजार ही किडनी ट्रांसप्लांट हो पाती हैं। जरूरत और पूर्ति के बीच की यह दूरी डोनर्स के कमी के कारण है।

किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ीं कुछ जरूरी बातें... > प्रत्येक अस्पताल के पास एक अधिकारिक कमिटी होती है जो डोनेशन की इजाजत देती है। > जो डॉक्टर्स ट्रीटमेंट में शामिल होते हैं वे डोनेशन के लिए इजाजत देने वाली टीम में शामिल नहीं होते। > जीवित व्यक्ति द्वारा किडनी डोनेट करने के मामले में डोनर के पास मरीज से पारिवारिक संबंध का प्रूफ होना जरूरी है। > हर महीने होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी मुल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है। > किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। > कानून के अनुसार शरीर के किसी भी हिस्से को बेचने या खरीदने पर 10 साल की सजा और 2 करोड़ तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

कौन कर सकता है किडनी डोनेट परिवार में माता, पिता, बेटा, बेटी, दादा और दादी अपनी किसी भी परिवार के सदस्य के लिए किडनी डोनेट कर सकते हैं। अलग से डोनर्स के लिए कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ती है। एक आंकड़े के अनुसार 95 फीसदी किडनी डोनेशन जीवित लोगों द्वारा किया जाता है और केवल पांच फीसदी ही ब्रेन डेड हो चुके लोगों द्वारा किया जाता है।

ये होता है ब्रेन डेड जब ब्रेन काम करना बंद कर दे और दिल की धड़कनें चल रही हों, उस स्थिति को ब्रेन डेड कहा जाता है। डॉक्टरों के लिए किसी मरीज को ब्रेन डेड घोषित करना बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

किडनी के खराब होने के लक्षण सुबह सोकर उठने पर मुंह पर सूजन का होना। रात में बार-बार टॉयलेट के लिए जाना। पानी ज्यादा पीने पर भी यूरिन कम आना। यूरिन का रुक-रुक कर आना। यूरिन का रंग लाल होना। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि व महिलाओं में यूरिन इनफेक्शन भी इसका कारण हो सकता है।