यहां 30 घरों के चिराग बुझ गए, किसी नेता को नहीं फिक्र

नई दिल्‍ली (21 जनवरी): हैदराबाद के एक दलित छात्र की सुसाइड पर दिल्ली तक की राजनीति में हड़कंप मच गया। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन दिल्ली से सिर्फ 500 किलोमीटर दूर 30 घरों के चिराग बुझ गए और किसी को इसकी कोई फिक्र नहीं।

जी हां, राजस्थान के कोटा में छात्रों की एक के बाद एक हो रही आत्महत्या थम नहीं रही। अब फिर खबर आई है कि एक और छात्र ने अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया। गुजरात से इंजीनियर बनने का सपना लेकर नितेश कोटा पहुंचा था, लेकिन सपनों का बोझ ऐसा बना कि फंदा लगाकर जान दे दी। अब नितेश के परिवार में मातम पसरा है, लेकिन ये दुख पिछले एक साल में 30 परिवारों पर टूटा है।

साल 2013 में 17 छात्र-छात्रों ने फांसी के फंदे पर अपनी जिंदगी को लटका दिया। साल 2014 में आंकड़े और बढ़ गए कोटा में करीब 26 घरों के चिराग बुझ गए और 2015 से अब तक 30 छात्र अपनी जा दे चुके हैं। कोटा मौत का कब्रगाह बन रहा है, लेकिन जैसे सरकार कोई फिक्र नहीं। ये बात सही है कि हैदराबाद में जो हुआ वो कहीं नहीं होना चाहिए, लेकिन राजनीति की रोटी सेंक रहे नेताओं को कोटा की तरफ भी रुख करना चाहिए ताकि सुसाइड सेंटर बने कोटा को फिर सपनों के शहर में तब्दील किया जा सके।

देश की एजुकेशन राजधानी के रूप में मशहूर है कोटा, लेकिन अब ये डॉक्टर और इंजनीयिर बनने का सपने रखने वाले छात्रों के लिए जैसे कब्रगाह बन रहा है। कोटा की इस हालत के लिए हम सिर्फ सरकार को कोस कर नहीं रह सकते बल्कि माता-पिता, कोचिंग सेंटर और सरकार को मिलकर मुहिम चलानी चाहिए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो कई घर के चिराग बुझने से बच सकते हैं। जैसे कोचिंग संस्थानों में काउंसलर रखना अनिवार्य होना चाहिए। सप्ताह में कम से कम एक बार बार छात्र की काउंसलिंग होनी चाहिए। कोचिंग इंस्टीट्यूट के लिए भी गाइडलाइन बननी चाहिए और कुछ कोचिंग संस्थानों ने हेल्पलाइन शुरू की जिसे बेहतर करने की जरूरत है।

देखिए पूरी रिपोर्ट

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=1fw76-KfLXI[/embed]