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नए कंपनी नियमों से परेशान 30 ऑडिटर्स ने छोड़ीं भारतीय कंपनियां

मोदी सरकार की नीतियों के चलते कॉरपोरेट जगत में हलचल मची हुई है। मोदी सरकार की ओर से कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानक इतने कड़े कर दिए हैं कि इस साल जनवरी से अब तक 30 से अधिक फर्मों ने ऑडिटर के रूप में कंपनियों के असाइनमेंट छोड़ दिए।

नई दिल्ली (2 जून): मोदी सरकार की नीतियों के चलते कॉरपोरेट जगत में हलचल मची हुई है। मोदी सरकार की ओर से कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानक इतने कड़े कर दिए हैं कि इस साल जनवरी से अब तक 30 से अधिक फर्मों ने ऑडिटर के रूप में कंपनियों के असाइनमेंट छोड़ दिए। प्राइम डाटाबेस की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक 2017 में करीब 7 ऑडिटर्स ने इस्तीफा दिया था।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कई मामलों में जब लेखा परीक्षकों ने कम्पनी छोड़ी , उसी के आसपास इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और कंपनी सचिवों ने भी इस्तीफा दे दिया। जानकारों के अनुसार इस तरह के कई और इस्तीफे आ सकते हैं। 

प्राइम डाटाबेस के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव हल्दिया ने कहा, 'जब कम समयावधि के बीच ऑडिटर्स, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और सीएस ने इस्तीफा दे दिया, तो आमतौर पर इसका मतलब है कि चेतावनी बंद होनी चाहिए।' कंपनी कानून की अनिवार्यता के बाद ऑडिट रोटेशन समाप्त हो गया।  

कॉरपोरेट जगत के जानकारों की मानें तो ऑडिटर्स के काम छोड़ने की एक वजह रेग्युलेटर्स का डर या कंपनी के आंतरिक कारण हो सकते हैं। जांच के माहौल को देखते हुए, ऑडिट फर्म भी अपनी ओर से अतिरिक्त सावधानियां बरत रही हैं। मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए नए कंपनी नियमों के कारण इन दिनों कोई ऑडिट कंपनी जोखिम लेने को तैयार नहीं है।

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