'भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लंबित, 40 हजार नये जजों की जरूरत'

नई दिल्ली (26 मई): सवा सौ करोड़ की जनसंख्या वाले देश भारत की अदालतों में लगभग तीन करोड़ मुकदमे निपटारे की वाट जोह रहे हैं। 1987 में बने लॉ कमीशन रिपोर्ट को माना जाये तो कम से कम 40 हजार नये जज नियुक्त किये जाये तो लंबित मुकदमों का समय पर निपटारा हो पायेगा। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह जानकारी कुछ दिनों पहले भारत के मुख्य न्यायधीश ने दी थी। \

हालांकि मौजूदा सरकार ने मुख्य न्यायधीश के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत के न्यायिक मंत्री सदानंनद गौड़ा ने कहा है कि 1987 वाली लॉ कमीशन की रिपोर्ट की सिफारिशों को आधार नहीं बनाया जा सकता, क्यों कि रिपोर्ट में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं दिया गया है। सारी बातें  मौखिक तथ्यों के आधार पर हैं। इस समय भारत में वैश्विक तुलना में सबसे कम जज हैं। इस समय लोअर कोर्ट्स में 20502, हाई कोर्ट्स में 1065 और सुप्रीम कोर्ट में 31 जज हैं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट्स में 170 जजों की नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। बाकी जहां कहीं भी कमी उसे प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा।