24 साल बाद ब्रिटेन से हुआ पहला प्रत्यर्पण, माल्या सहित अन्य को लाना बाकी

नई दिल्ली(19 अक्टूबर): हीथ्रो एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए मंगलवार को उड़ान भरने वाली एक फ्लाइट ने इतिहास बना दिया। 24 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब ब्रिटेन ने भारत के किसी मोस्टवॉन्टेड अपराधी को भारत में प्रत्यारोपित किया है।

दोनों देशों के बीच में 22 सितंबर, 1992 को प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां विभिन्न आधारों पर ब्रिटेन से प्रत्यर्पण सुरक्षित करने में 24 साल से सक्षम नहीं होने पर निराश होती रही हैं।

हालांकि, साल 2002 के गुजरात दंगों में समीरभाई वेनुभाई पटेल का मंगलवार को किया गया प्रत्यर्पण इस मामले में लंदन में नजरिए में बदलाव को नहीं दर्शाता है। भारत द्वारा अन्य वांछित लोगों के विपरीत 40 साल के पटेल ने प्रत्यर्पण का विरोध नहीं किया। उनकी सहमति के कारण यह लंबी प्रक्रिया छोटी हो गई।

पटेल को 9 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और 22 सितंबर को गृह सचिव अंबर रुड ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए। पटेल ने प्रत्यर्पण को सहमति किस कारण से दी, इसका पता नहीं चल पाया है। मगर, भारतीय हलकों में तत्कालीन गृह मंत्री एसबी चव्हाण और उनके ब्रिटिश समकक्ष केन क्लार्क संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद से ब्रिटेन से पहले सफल प्रत्यर्पण पर अधिकारी खुश जरूर हैं।

गुजरात पुलिस के एक दल ने यहां पिछले सप्ताह पटेल को एस्कॉर्ट करने के लिए आया था। वह 1 मार्च 2002 को गुजरात के आणंद जिले के ओड गांव में में हुए दंगे के मामले में ट्रायल का सामना करेंगे। उस हिंसा में कथित तौर पर 23 लोगों की मौत हो गई थी।

पटेल को भारत में हुए दंगों के बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत में रिहा होने के बाद वह लंदन के उपनगर हाउंस्लो भाग गया था, जहां स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। पटेल के उलट टाइगर हनीफ लगातार भारत में प्रत्यर्पण का विरोध करता आ रहा है। वह साल 1993 में सूरत में हुए बम धमाके में भारत द्वारा वांछित है।

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी हनीफ को ग्रेटर मैनचेस्टर में मार्च 2010 में गिरफ्तार किया गया था। भारत में प्रत्यर्पण का विरोध करने के पीछे उसका आधार है कि भारतीय जेलों में उसके साथ अत्याचार किया जाएगा। मगर, उसकी दलीलों को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में न्यायाधीश ने मई 2012 में खारिज कर दिया।

अदालत ने जेल की स्थिति की जांच करने और हनीफ की याचिका की वैधता का पता करने के लिए गुजरात में एक टीम भेजी। इसके बाद न्यायाधीश ने इसे खारिज कर दिया और उसे एक "क्लासिक भगोड़ा' करार दिया। हनीफ का पूरा नाम मोहम्मद उमरजी पटेल है। उसने मई 2012 में अदालत के फैसले के बाद गृह सचिव थेरेसा मे से अंतिम अपील की। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि गृह सचिव के पास हनीफ के अंतिम अपील पर कोई अपडेट नहीं है।

भारत ने वित्तीय अनियमितताओं में शामिल ललित मोदी और विजय माल्या के पासपोर्ट को रद्द कर दिया है और उनके निर्वासन की मांग ब्रिटेन से की है। मगर, अभी तक ब्रिटेन ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। भारत ने प्रत्यर्पण के जरिए ब्रिटेन से करीब 15 वांछितों की मांग की है। इनमें से कुछ के नाम नीचे दिए गए हैं-

विजय माल्या (वित्तीय)

ललित मोदी (वित्तीय)

रवि शंकरन (भारतीय नौसेना वार रूम लीक मामले)

टाइगर हनीफ (गुजरात में 1993 में हुए विस्फोटों)

नदीम सैफी (गुलशन कुमार की हत्या के मामले)

रेमंड वर्ली (ब्रिटेन के नागरिक, गोवा में बाल उत्पीड़न के मामलों)