2016: रियो में साक्षी-सिधु ने किया नाम रोशन, खूब चला विजेंद्र का पंच

नई दिल्ली (26 दिसंबर): साल 2016 खेलों में उपलब्धि के लिहाज से भारत के लिए मिला-जुला रहा। भारत के कई बड़े कद वाले खिलाड़ियों ने विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में देश को निराश किया तो वहीं, कई ऐसे भी खिलाड़ी उभरकर सामने आए जिन्होंने अपने प्रदर्शन से भारतीय खेल प्रेमियों को गौरवान्वित होने का मौका दिया। रियो ओलंपिक में ही कई नए खिलाड़ियों ने विश्व पटल पर अपना लोहा मनवाया तो दिग्गजों ने निराश किया।  उन खेलों और खिलाड़ियों पर नज़र डालते हैं, जिन्होंनेरि 2016 में खेलों में भारत को पहचाई दिलायीः

पीवी सिंधु: साल 2016 में भारत के लिए खेलों में सबसे बड़ी उपलब्धि बैडमिंटन की नई सनसनी पीवी सिंधु रहीं। सिंधु ने इस साल रियो ओलंपिक में रजत पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। महिला बैडमिंटन सिंगल के फाइनल मुकाबले में सिंधु को विश्व की नंबर खिलाड़ी स्पेन की खिलाड़ी कैरोलिना मारिन ने 21-19, 12-21, 15-21 से हरा दिया। पीवी सिंधु स्वर्ण पदक से भले ही चूक गईं लेकिन, वह ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। उन्होंने इस साल चाइना ओपन का खिताब भी अपने नाम किया। शाइना नेहवाल के बाद वह चाइना ओपन जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनी।

 (रियो ओलंपिक 2016 में कांस्य पदक जीतने बाली साक्षी मलिक।)

साक्षी मलिक: रियो ओलंपिक में कुश्ती में भारतीय खेल प्रेमियों को नरसिंह यादव और योगेश्वर दत्त जैसे नामी पहलवानों से उम्मीदें थीं। लेकिन, भारत को रियो ओलंपिक का पहला पदक दिलाया हरियाणा की साक्षी मलिक ने। साक्षी ने 58 किलो ग्राम भार वर्ग के मुकाबले में कांस्य पदक जीता। साक्षी के लिए ये पदक आसान नहीं था। साक्षी को रेपचेज के पहले राउंड में किर्गिस्तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा से 0-5 से हार का सामना करना पड़ा, दूसरे राउंड की शुरुआत में पिछड़ने के बाद साक्षी ने जबरदस्त वापसी की और 8-5 से मैच जीतकर इतिहास रच दिया। साक्षी को खेलों में उनके योगदान के लिए इस साल ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ पुरस्कार से नवाजा गया।

सानिया मिर्जा: भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के महिला युगल मुकाबले में जीत दर्ज की।सानिया मिर्जा और स्विटजरलैंड की मार्टिना हिंगिस की जोड़ी ने चेक गणराज्य की सातवीं वरियता प्राप्त जोड़ी एंड्रिया लावाकोवा और लूसी हराडेका को फाइनल मुकाबले में हराया। महिला युगल में सानिया मिर्जा के करियर का यह तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब था। सानिया मिर्जा को खेलों में योगदान के लिए इस साल पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। टाइम मैगजीन ने उन्हें साल 2016 के दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल किया।

दीपा मलिक: पैरालंपियन दीपा मलिक ने इस साल रियो पैरालंपिक में देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा किया। दीपा गोला फेंक एफ-53 प्रतिस्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला पैरालंपियन बनीं। दीपा मलिक कमर से नीचे का हिस्सा लकवा से ग्रस्त हैं और ट्यूमर की वजह से दीपा के 31 ऑपरेशन हो चुके थे।

 

दीपा कर्माकर: खेलों में पूर्वोत्तर भारत के खिलाड़ियों का अहम योगदान माना जाता है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए त्रिपुरा की दीपा कर्माकर भी इस साल की खोज रहीं। तेईस वर्षीय दीपा ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट हैं। उन्होंने औसत 15.066 अंक जुटाये, जिससे वह स्विट्जरलैंड की कांस्य पदक विजेता गुईलिया स्टेनग्रुबर (15.216 अंक) से महज 0.15 अंक से चूक गईं। प्रोदुनोवा जैसे खतरनाक लेवेल, जिसे करने का जोखिम रूस और अमेरिका के जिम्नास्ट भी नहीं उठाते, को अंजाम देकर कर्माकर ने करोड़ों देशवासियों का दिल जीता। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में कई पदक जीतने के बावजूद एक खिलाड़ी वो लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाता जो दीपा ने रियो में चौथे स्थान पर रहकर अर्जित की।

जुनियर हॉकी विश्वकप: भारत ने 15 साल बाद जूनियर हॉकी विश्व कप का खिताब जीता। लखनऊ के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर खिताब पर कब्‍जा किया। भारत के लिए गुरजंत सिंह (सातवां मिनट) और सिमरनजीत सिंह (23वां मिनट) ने गोल किये, जबकि बेल्जियम के लिये आखिरी मिनट में पेनल्टी कार्नर पर फेब्रिस वान बोकरिज ने गोल किया।

 

देवेन्द्र झाझरिया, थंगावेलु मरियप्पन, वरुण सिंह भाटी: ओलंपिक के बाद रियो डी जेनेरियो में ही 7 से 18 सितंबर के बीच पैरालिम्पिक खेलों का आयोजन हुआ। इसमें भारत की झोली में चार पदक आए। रियो पैरालिम्पिक में हाईजंप में थंगावेलु मरियप्पन और जैवेलिन थ्रो में देवेंद्र झाझरिया ने स्वर्ण पदक जीता था। वहीं दीपा मलिक ने शॉटपुट में रजत पदक हासिल किया जबकि वरुण सिंह भाटी ने हाई जंप में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

डब्ल्यूबीओ एशिया पैसेफिक सुपर मिडिलवेट चैंपियन विजेंदर सिंह: पेशेवर मुक्केबाजी में विजेंदर सिंह ने भारत को नई पहचान दी है। उन्होंने अपने पेशेवर मुक्केबाजी में खेले गए अब तक के आठों मुकाबलों में जीत दर्ज की है, जिनमें से सात मुकाबलों में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदियों को नॉक आउट किया है। इसी साल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के कैरी होप को मात देकर डब्ल्यूबीओ एशिया पैसेफिक सुपर मिडिलवेट खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने हाई वोल्डेज मुकाबले में फ्रांसिस चेका को मात देकर इस खिताब को अपने पास रखा।