2016: कश्मीर-कालाधन-शराबबंदी-अम्मा और सपाई बाप-बेटे की तू-तू, मैं-मैं

नई दिल्ली (31 दिसंबर): गुजरने वाले साल 2016 में राजनीति में काफी हलचल रही। यहां आपको फिर से याद दिला रहे हैं, बीते साल की कुछ खास खबरों परः

1- पहली बारः लाल किले से बलूचिस्तान और पीओके के लोगों को शुक्रिया स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा पहली बार हुआ जब पीएम ने लाल किले से अपनी स्पीच में पीओके और बलूचिस्तान का जिक्र किया। मोदी ने कहा, ''पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान और पाक के कब्जे वाले इलाके के लोगों ने जिस तरह से मुझे बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है, इस पर मैं उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।''  मोदी ने कश्मीर मसले पर ऑल पार्टी मीटिंग में कहा था कि पीओके भी भारत का हिस्सा है। इस पर पीओके और बलूचिस्तान के लोगों ने मोदी का शुक्रिया अदा किया था।

2- मोदी मंत्रिमंडल में जुलाई में फेरबदल से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का कद पहले से कम हो गया। स्मृति ईरानी की जगह प्रकाश जावडे़कर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया। संतोष गंगवार का स्वतंत्र प्रभार का दर्जा हटाकर राज्यमंत्री बनाया दिया गया। सूचना व प्रसारण मंत्रालय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू को दे दिया गया। संसदीय कार्य मंत्रालय रसायन व उर्वरक मंत्री अनंत कुमार को दिया गया। वीरेंद्र सिंह की जगह नरेंद्र सिंह तोमर ग्रामीण विकास मंत्री बनाए गए जबकि वीरेंद्र को इस्पात मंत्रालय मिला। मनोज सिन्हा को रेल राज्यमंत्री के साथ संचार मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार दिया गया। एमजे अकबर को विदेश राज्यमंत्री व महेंद्रनाथ पांडे को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री बनाया गया। अनुप्रिया पटेल स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री बनीं।

3- दिसंबर 2015 में अरुणाचल में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना जब कांग्रेस के 47 में से 21 विधायकों ने मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ बगावत कर दी। इसके बाद राज्य में 26 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। उसी दिन कांग्रेस के बागी नेता कालिखो पुल को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया। केंद्र सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को कांग्रेस के नेतृत्व वाली तुकी सरकार को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया। तुकी फिर सीएम बन गए लेकिन उन्होंने तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस विधायकों ने पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुना, उन्होंने 16 जुलाई को सीएम पद ग्रहण कर लिया। लेकिन प्रदेश कांग्रेस को उस समय झटका लगा जब दो माह बाद खांडू सहित पार्टी के 43 विधायक पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (पीपीए) में शामिल हो गए। विधानसभा में कांग्रेस के 44 विधायक थे। पीपीए भाजपा की सहयोगी पार्टी है, वह भी खांडू सरकार में शामिल हो गई। अब फिर प्रदेश में सियासी संकट है, मुख्यमंत्री खांडू को उनकी ही पार्टी ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। तकाम परियो को अगला सीएम बनाया जा सकता है।

4- उत्तराखंड में 18 मार्च को कांग्रेस के 9 विधायकों ने विधानसभा में सरकार के खिलाफ बगावत कर दी, जिसके बाद हरीश रावत सरकार के लिए खतरा मंडराने लगा। राज्यपाल ने हरीश रावत को बहुमत सिद्ध करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया। बागी विधायकों की मदद से भाजपा के सरकार बनाने की अटकलें तेज हो गईं। लेकिन सियासी उठा-पटक के साथ मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया और कोर्ट ने 10 मई को रावत सरकार को बहुमत साबित करने का फैसला सुनाया। शक्ति परीक्षण में सीएम रावत ने बहुमत हासिल कर लिया।

5- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को परास्त करते हुए 136 सीटें जीतीं, जो 234 सदस्यीय विधानसभा में जादुई आंकड़े से 18 ज्यादा रही। अन्नाद्रमुक के प्रदर्शन में पिछली बार की तुलना में गिरावट आयी। 2011 के चुनाव में पार्टी ने 150 सीटें जीती थीं। हालांकि 1984 के बाद से तमिलनाडु में पहली बार सत्तारूढ़ पार्टी को जनता ने सत्ता में वापसी का टिकट दिया। 91 साल के एम करूणानिधि के नेतृत्व में द्रमुक ने मजबूत चुनौती पेश करते हुए 89 सीटें जीतीं।  करीब 75 दिन से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का 5 दिसंबर की देर रात निधन हो गया। तमिलनाडु सरकार के मंत्री और अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता ओ. पन्नीरसेल्वम को सोमवार देर रात ही मुख्यमंत्री के पद की शपथ दिलाई गई। अस्पताल की तरफ से दिए गए बयान में कहा गया, यह बताते हुए बड़ा दुख हो रहा है कि ‘अम्मा’ जयललिता अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने रात 11.30 बजे अंतिम सांस ली।’

6- पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापस आईं। उनके नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया। तृणमूल ने 2011 के अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 211 सीटें जीतीं। पिछली बार पार्टी को 184 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने भी राज्य में अपना प्रदर्शन बेहतर करते हुए पिछली बार के 42 की तुलना में 44 सीटें जीतीं। कांग्रेस की सहयोगी माकपा को पिछली बार के 40 सीटों की तुलना में इस बार केवल 26 सीटें मिलीं जबकि दूसरे वाम दलों भाकपा को एक, फॉरवर्ड ब्लॉक को दो और आरएसपी को तीन सीटें मिलीं।

7- यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में सत्ता के लिए सियासी संग्राम उस समय सार्वजनिक हो गया जब सीएम अखिलेश यादव ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। बाद में शिवपाल सिंह यादव से लोक निर्माण विभाग ले लिया। इसके बाद चाचा और भतीजे में सियासी लड़ाई तेज हो गई। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सुलह के प्रयास तेज कर दिए और संदेश दिया कि उनके जीते जी सपा का विभाजन नहीं हो सकता। उन्होंने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया और भाई शिवपाल को कमान दे दी। सुलह के तहत बर्खास्त सभी मंत्रियों को वापस लाने पर सहमित बनी, पर सियासत के और दांव बाकी थे। इस बीच रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया गया। शिवपाल सिंह यादव चुनाव की तैयारियों में जुट गए तो अखिलेश ने रथ यात्रा निकाली। इस बीच 28 दिसंबर को मुलायम ने 325 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी, जिसमें अखिलेश के नजदीकी मंत्रियों और विधायकों के टिकट काट दिए गए। 10 बर्खास्त मंत्रियों को टिकट दे दिया गया। इस पर अखिलेश ने 29 दिसंबर को मुलायम से मुलाकात के बाद 235 उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी कर दी। इसके कुछ देर बाद ही उनके चाचा शिवपाल ने पार्टी के 68 अन्‍य उम्‍मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी की। इससे पहले मुलायम-शिवपाल पहले ही 325 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की थी। यानि प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल की ओर से अब तक 393 उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। अखिलेश ने हर उस दावेदार को टिकट दे दिया जिसे मुलायम-शिवपाल ने खारिज कर दिया था। अब कई सीटों पर तो सपा से दो-दो प्रत्याशी हो गए हैं। इस सियासी संग्राम का ऊंट किस करवट बैठता है यह वक्त तय करेगा।

8- एक अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागूबिहार की सत्ता दोबारा हाथ में आने पर सीएम नीतीश कुमार ने राज्य में एक अप्रैल 2016 से शराब की खरीद और ब्रिकी पर रोक लगा दी। सीएम ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया कि शराब से विशेषकर गरीब लोगों का जीवन जहां प्रभावित होता है, वहीं महिलाएं भी इससे परेशान रहती हैं। देशी और मसालेदार शराब जहां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, वहीं कम आमदनी वाले लोग इसका अधिक सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों को इससे आर्थिक क्षति होती है। मद्य निषेध नीति के लागू होने से राजस्व पर 4000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा और इसकी भरपाई के लिए अलग से उपाय किये जायेंगे। नोटबंदी का मामला पटना हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

9- कालाधन वापस लाने का वादा करके केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार ने काले कुबेरों के खिलाफ आठ नवंबर को सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। 500 और 1000 के पुराने नोटो को बंद करने का फैसला कर लिया। फैसले से देशभर में बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लग गईं। पीएम मोदी ने 50 दिन में हालात सामान्य होने की बात कही लेकिन ऐसा न होने पर कहने लगें कि 50 दिनों के बाद से लोगों की तकलीफें कम होनी शुरू हो जाएंगी। 31 मार्च 2017 के बाद किसी के पास 500 और 1000 रुपये के 10 से अधिक पुराने नोट पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों की ऐलान कर दिया गया। नोटबंदी के फैसले से एक ओर डिजिटल भुगतान के प्रति लोग जागरूक हुए तो दूसरी ओर कालाधन रखने वालों लोगों की धरपकड़ तेज हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फैसले के 50 दिन के अंदर 3600 करोड़ रुपये का कालाधन पकड़ा गया।