जानें आखिर कहां जा रहे हैं 2 हजार के नोट...

नई दिल्ली (22 अप्रैल): सरकार ने नोटबंदी के बाद 2 हजार का गुलाबी नोट जारी किया था, लेकिन अब ये नोट बाजार और एटीएम गायब हो गया है। यही वजह थी कि पिछले दिनों लोगों को कैश की किल्लत से दिक्कत का सामना करना पड़ा। साफ है कि गुलाबी के नोटों की जमाखोरी हो रही है। दो हजार के नोट को लोगों की तिजौरी से बाहर निकालने के लिए सरकार एक साथ कई मोर्चे पर काम कर रही है।

एटीएम से ज्यादा कैश निकालने वाले लोगों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि दक्षिणी राज्यों से कॉन्ट्रैक्टर्स चेक जारी कर प्रॉजेक्ट पर खर्च के नाम पर बड़ी तादाद में कैश निकाल रहे हैं और ये पैसे वापस बैंकों में नहीं पहुंच रहे हैं, जिसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर ऐसे कॉन्ट्रैक्टर्स आ गए हैं। छापेमारी और जांच में जुटी सरकारी एजेंसियों को शक है कि बड़ी तादाद में निकाला गया कैश कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों इस्तेमाल हो सकता है।

पिछले 15 दिनों में पांच गुना ज़्यादा कैश निकाला गया। बैंको के मुताबिक जितना कैश बाजार में पहुंचा उतना वापस नहीं आया। इसीलिए कहा जा रहा है कि लोगों ने 2000 के नोट की जमाखोरी कर ली है। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद देश में काला धन बढ़ गया है और नकली नोटों की भरमार हो गई है। कहा जा रहा है कि नोटबंदी के बाद देश के ज्यादातर बैंकों में नकली नोट जमा हुए। बैंकिंग इतिहास का ये अब तक का सबसे ज्यादा नकली नोट मिलने का मामला है।

सरकारी, निजी बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों में संदिग्ध लेन देन यानी एसटीआर के मामलों में भी जबदस्त उछाल आया है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद बैंकों में संदिग्ध लेनदेन की संख्या में 480 फीसदी का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2016-17 में संदिग्ध लेनदेन के 4 लाख 73 हजार मामले सामने आए थे, जो 2015-16 के मुकाबले 4 गुना ज्यादा थे और इसकी वजह नोटबंदी को ही माना जा रहा है।

संदिग्ध लेनदेन के करीब 56 हजार मामले इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई और डीआरआई जैसी तमाम जांच एजेंसियों के साथ भी साझा किए गए। सरकार भले ही नोटबंदी को लेकर तमाम तरह के दावे कर रही थी, लेकिन फाइनेंशियल इंटेलीजेन्स यूनिट के बाद नोटबंदी को लेकर तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं।

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