200 साल से लड़कियां यहां जी रही हैं नर्क की जिंदगी

नई दिल्ली (25 जून): भले ही दुनियाभर में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात कही जाती हो, लेकिन यह सच हैं कि दुनिया में कुछ जगह ऐसी भी हैं। जहां सदियों से महिलाएं नर्क से भी बुरा जीवन जीने को मजूबर है। इन महिलाओं को वेश्यावृत्ति की इस दलदल से निकालने के लिए कोई आगे नहीं आता।

बांग्लादेश उन देशों की लिस्ट में शामिल है, जहां पर वेश्यावृत्ति को लीगल माना जाता हैं। यहां के तंगेल जिले का कांडापारा वेश्यालय देश का कम से कम 200 साल पुराना और दूसरा सबसे बड़ा वेश्यालय है। 2014 में इसे ध्वस्त कर दिया गया था, लेकिन इसको स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों की मदद से फिर से स्थापित कर दिया गया है। ऐसी बहुत-सी महिलाएं जो यहां पर जन्म लेती है और बाहर की दुनियां देखे बिना ही मर जाती हैं।   आजकल यह 'वेश्यालयों का जिला' एक बड़ी-सी दीवार से चारों तरफ से घिरा हुआ है। संकरी गलियां, खाने की धकेल, चाय की दुकानें और घूम-घूमकर सामान बेचते स्ट्रीट वेंडर्स ही इस जगह की पहचान बन चुके हैं। इस जगह के अपने नियम-कानून हैं जो बाहरी समाज से बिल्कुल अलग हैं। इस शहर की कुछ महिलाएं कमजोर है और कुछ ताकतवर हैं। जब कभी भी यहां छोटी-सी बच्ची आती हैं, तो उसके साथ बंधुआ की तरह बर्ताव किया जाता हैं।

यहां पर आने वाली लड़कियां केवल 12 और 14 साल की ही होती हैं। इनके परिवार वाले गरीबी के कारण इन बच्चियों को कुछ पैसों के लालच में यहां छोड़ जाते हैं। यहां पहुंचकर वह लड़कियां मानव तस्करी की शिकार हो जाती हैं। इनको एक महिला के अधीन रखा जाता है, जो घुट-घुट कर यहां अपनी जिंदगी बिता देती हैं। जब वह इनकी कीमत की रकम चुका देती है तो फिर उनको यहा से जाने दिया जाता हैं, लेकिन ज़्यादातर महिलाएं सामाजिक रूप से अपने परिवार के लिए 'कलंकित' हो जाती हैं। इसलिए वह घर पापिस जाने के बजाए वहां रहना ही बेहतर समझती है।