जुलाई रहा दुनिया में 137 साल का सबसे गर्म महीना

नई दिल्ली(20 अगस्त):  मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बढ़ रही गर्मी को लेकर एक नई रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक इस साल के शुरुआती छह महीनों में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया है। जबकि इस साल जुलाई 137 साल का सबसे गर्म महीना रहा है। यहां तक कि पिछले 15 साल से जुलाई में तापमान लगातार बढ़ रहा है। यह दावा अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन की बुधवार को जारी रिपोर्ट में किया गया है।

इसके पीछे ज्योग्राफिकल हालात के अलावा पेड़ों की लगातार कटाई को भी बड़ी वजह बताया गया है। 

- अमेरिका के नेशनल ओशन और एटमाॅस्फियर एडमिनिस्ट्रेशन में तापमान का ब्यौरा 1880 से रखा जा रहा है। सोमवार को जारी नासा की रिपोर्ट में भी जुलाई 2016 को अब तक का सबसे गर्म महीना बताया गया है।

- देश में हर साल 15 लाख हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं, जबकि बढ़ोतरी सिर्फ 3.26 लाख हेक्टेयर की हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक पेड़ काटने से 10 साल में हरियाली 20% तक कम हो गई है।

- दुनिया में हर साल करीब 15 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं, जबकि सिर्फ 5 अरब पेड़ लगाए जाते हैं। इस असंतुलन से पर्यावरण, फसल चक्र और हमारे जीवन पर असर पड़ रहा है। 

- इस वजह से बेमौसम बारिश, बाढ़, गर्मी जैसी आपदाएं भी आ रही हैं। बर्कलेअर्थ की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वजह से पिछले 200 साल में भारत का औसत तापमान 2.2 डिग्री तक बढ़ गया है।

दो साल में 20% फसल बर्बाद

- 2014 और 2015 के दौरान देश में कहीं मॉनसून में गिरावट आई, कहीं अनियमित बारिश हुई तो कहीं सूखा पड़ा। मौसम के इस बदलाव की एक बड़ी वजह अलनीनो बताई गई।

- इससे फसल बर्बाद हुई और अनाज और खाद्य पदार्थों में 20% तक कमी हो गई। इसके अलावा एशिया में गेंहू, ताड़ के तेल और चावल का उत्पादन भी घटा।

मिट्टी बहने से हर साल 2 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान

- देश में बारिश के दौरान नदियों के किनारे, पहाड़ी इलाकों और अन्य स्थानों से बारिश के दौरान हर साल जमीन की ऊपरी परत की करीब 60 टन उपजाऊ मिट्टी बह जाती है।

- इससे देश को करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है। जबकि उपजाऊ मिट्टी की एक इंच मोटी परत बनाने में प्रकृति को 1,000-1,500 साल तक लगते हैं।  

खुद हमने पैदा की है समस्या

- बड़े पैमाने पर मौसम में अनिश्चित बदलाव या तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। जैसे- अचानक गर्मी या सर्दी, बारिश के पैटर्न में बदलाव, समुद्र के जल स्तर में बढ़ोतरी या ग्लेशियर का पिघलना। 

- यह पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, अल नीनो जैसे भौगोलिक प्रभाव और ज्यादा कार्बन उत्सर्जन की वजह से हो रहा है।

 

- अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक मानव सभ्यता से अब तक 46% पेड़ नष्ट हो चुके हैं। 

- यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक अभी एक हफ्ते में 5 लाख हैक्टेयर जंगल नष्ट हो रहा है। यह कुल जंगल का 1% है और पिछले 10 साल की तुलना में 50% ज्यादा है। 

- बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी पर हुए बॉन सम्मेलन के मुताबिक जंगलों को नुकसान और अन्य पहलू 2050 तक गरीबों का जीवन स्तर आधा कर देंगे और दुनिया की जीडीपी 7% तक घटा देंगे।