सरकार की कोशिश नाकाम, 2 सितंबर को होकर रहेगी हड़ताल

नई दिल्ली (31 अगस्त): मोदी सरकार की आखिरी वक्त तक कई घोषणा करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित राष्ट्रीय मजदूर संघ को छोड़कर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दो सितंबर से देशव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इस हड़ताल को कांग्रेस और लेफ्ट से जुड़े ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन हासिल है।

सरकार ने अकुशल और गैरकृषि कार्य में लगे मजदूरों की मजदूरी प्रति दिन 246 रुपये से बढ़ाकर 350 करने की घोषणा की है। दूसरी तरफ ट्रेड यूनियन की मांग है कि इन मजदूरों को हर महीने 15,000 से 18,000 रुपये के बीच मिले। इसके साथ ही यूनियन दो साल के बोनस की मांग कर रहे हैं। समस्या यह है कि भारत में सबसे ज्यादा अकुशल मजदूरों की संख्या है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच समान सैलरी की व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही अलग-अलग सेक्टर में जैसे-कंस्ट्रक्शन, स्वीपिंग, क्लीनिंग और स्टोन माइन्स में सैलरी स्ट्र्क्चर अलग-अलग हैं। अभी तक सरकार के पास अकुशल मजदूरों की सैलरी को लेकर कोई फिक्स प्रणाली नहीं है।

31 मार्च, 2015 के सरकारी डेटा के मुताबिक केंद्रीय क्षेत्रों में ठेके के मजदूरों की संख्या 19,03,170 थी। राज्यों में काम करने वाले ठेके के मजदूरों की आधिकारिक संख्या का पता नहीं है। ठेके के मजदूरों का संचालन कॉन्ट्रैक्ट लेबर ऐक्ट, 1970 के तहत होता है। इसके तहत वे ही कंपनियां या कॉन्ट्रैक्टर आते हैं जहां 20 या 20 से ज्यादा लोग काम करते हैं।