पीलीभीत मामले में दोषी 47 पुलिसकर्मियों को उम्र कैद की सजा

नीरज आनंद, पीलीभीत (4 अप्रैल) : जिस फैसले का 25 साल से इंतजार था वो फैसला आ चुका है। उन परिवारों को इंसाफ मिल गया है, जिनके अपने 25 साल पहले बिना किसी गलती के गोलियों से भून दिए गए थे। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने आज 12 जुलाई 1991 को हुए जघन्य हत्याकांड के मामले में 47 पलिसवालों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। यही नहीं कोर्ट ने 47 के 47 पुलिसवालों पर जुर्माना भी ठोका है।

एसओ लेवल के पुलिसवालों पर 11 लाख का जुर्माना लगया गया है। जबकि, एसआई लेवल के पुलिसवालों पर 8 लाख का जुर्माना लगा है और कॉन्सटेबल लेबल के पुलिसवालों पर 75 हजार का जुर्माना भराना होगा। 

इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को 14 लाख रुपये की मदद देने की बात भी कहीं गई है। अब जाकर उन परिवारों को सुकून मिला होगा, जो 25 साल से अपने लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं, अब जाकर उन नम आंखों में खुशी आई होगी जो 25 साल से इंसाफ के लिए अदालत की ओर एक टक देख रही थीं। 

दरअसल, 12 जुलाई 1991 को पटना साहिब के दर्शन कर सिख तीर्थयात्रियों का जत्था बस में सवार होकर लौट रहा है। उस बस में 25 तीर्थयात्री सवार थे। जानकारी के मुताबिक उस वक्त दिन के 11 बज रहे थे, बस कछालाघाट पुल के पास पहुंची थी, तभी पुलिसवाले जबरन बस में घुसे और 11 तीर्थयात्रियों को बाहर निकाला, इसके बाद तीन अलग अलग थानों की पुलिस सीख तीर्थयात्रिय़ों को बांटकर अपने साथ ले गई। 

रात भर इधर-उधर घुमाने के बाद अगले दिन ही उन्हे मार दिया गया, पुलिस का दावा था कि ये आतंकी थी और हिन्दुस्तान को दहलाने की साजिश रच रहे थे। एफआईआर में पुलिस ने इन लोगों को आतंकी बताकर अवैध असलहों से जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था।