MYSTERY: कहां गया 186 करोड़ का सोना? देश के सबसे अमीर मंदिर का ''तिलिस्म''

डॉ. संदीप कोहली​

नई दिल्ली (16 अगस्त): देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर से 186 करोड़ के सोना गायब है। यह खुलासा किया है पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय ने।  उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर का ऑडिट किया था। जिसमें 186 करोड़ रुपए के सोने के 769 बर्तन गायब हुए हैं। 

- विनोद राय ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 1 हजार पेज की रिपोर्ट सौंपी है। - रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर में 1166 सोने के बर्तन होने चाहिए थे। - वर्तमान में सिर्फ 397 ही सोने के बर्तन मौजूद हैं, यानी 769 बर्तन गायब हैं।  - विनोद राय ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।  - रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर में मौजूद हर सामग्री को सीरियल नंबर दिए गए हैं।  - सुप्रीम कोर्ट ने अक्‍टूबर 2015 में राय से ऑडिट रिपोर्ट सौंपने को कहा था। 

क्या कहती है रिपोर्ट- रिपोर्ट में लिखा है कि मंदिर में पत्थर के बने लॉकर में लगभग 1988 सोने के बर्तन होने चाहिए थे। पर जांच में पता चला कि 822 सोने के बर्तनों को गलाकर गहने बना दिए गए। इसके बाद करीब 1166 सोने के बर्तन मंदिर में होने चाहिए थे। लेकिन विशेषज्ञों ने जांच के बाद पाया कि मंदिर में सिर्फ 397 बर्तन ही बचे हैं। रिपोर्ट में ये भी दर्ज है कि मंदिर में 14.18 लाख रुपये का सोना और चांदी रजिस्टर में दर्ज नहीं है जो कि गैरकानूनी है।

2011 में खुला था 'खजाना'

- 16वीं शताब्दी के इस मंदिर में त्रावणकोर के पूर्व शासकों का शादी मंदिर हुआ करता था।  - साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस मंदिर के पांच दरवाजों को खोला गया था - दरवाजों को कोड नाम दिया गया था।  - वॉल्ट 'A' 'C' 'D' 'E' और 'F' को खोल लिया गया है।  - कहा गया कि पांच तहखानों में 1 लाख करोड़ की कीमत के टनों सोने के सिक्के, आभूषण और हीरे मिले थे। - लेकिन अभी तक वॉल्ट 'B' को नहीं खोला गया है - कहा गया कि टीम ने वॉल्ट-बी को खोलने की शुरुआत तो की थी। - लेकिन दरवाजे पर बने कोबरा सांप के चित्र को देखकर काम रोक दिया गया।  - कई लोगों की मान्यता थी कि इस दरवाजे को खोलना अशुभ होगा। - शीर्ष अदालत ने 'ए' तहखाने से मिले खजाने की फेहरिस्त बनने तक 'बी' तहखाने को खोलने की बात को टाल दिया था - फरवरी 2016 में एक्सपर्ट पैनल ने मंदिर के बिना छुई गई तिजोरी को खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

क्या है अफवाहें  - कहा जा रहा है कि तहखाने 'B'की दीवार लोहे की इसलिए बनाई गई है कि उससे पूरे मंदिर को सपोर्ट मिल सके।  - और अगर 'B' के लोहे की दीवार के साथ छेड़छाड़ की गई तो हो सकता है कि मंदिर की नींव कमजोर पड़ जाए और मंदिर भरभराकर गिर पड़े।  - मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार ये तहखाना आखिरी बार 136 साल पहले खोला गया था और इसके अंदर क्या है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

कुछ लोग मानते हैं अपशकुन  - अभी तक छठे तहखाने यानि वॉल्ट 'B' को नहीं खोला गया है - टीम ने वॉल्ट 'B'को खोलने की शुरुआत तो की थी। - लेकिन दरवाजे पर बने कोबरा सांप के चित्र को देखकर काम रोक दिया गया।  - त्रावणकोर शाही खानदान के लोगों का मानना है कि इस तहखाने को खोलने से अपशकुन हो सकता है।  - यदि मंदिर का छठा ताहखाना खुला तो सर्वनाश हो जायेगा, तहखाने खोलने वाले की मौत हो जायेगी। - विपदा के रूप में भगवान विष्णु का गुस्‍सा झेलना पड़ सकता है। - यहां तक कहा जा रहा है कि छठे तहखाने में एक गुप्त सुरंग मौजूद है जो सीधे समंदर में जाकर खुलती है।  - इस तहखाने में कई ऐसे राज दफन हैं जिसके तिलिस्म को तोड़ना अच्छा नहीं है।  - राज परिवार की ये भी दलील है कि इस मंदिर से कई लोगों की आस्था जुडी है। - इसलिए किसी भी हाल में छठे तहखाने की लोहे की दीवार को तोड़ना उचित नहीं होगा।

पद्मनाभस्वामी मंदिर का क्या है इतिहास?

- पद्मनाभस्वामी मंदिर तिरुवनन्तपुरम में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है।  - पद्मनाभस्वामी मंदिर अपने खजाने के लिए लगातार चर्चा में रहा है। - इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है।  - जिसे देखने के लिए रोजाना हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं।  - प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं।  - मान्यता है कि तिरुअनंतपुरम भगवान के 'अनंत' नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है। - यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को 'पद्मनाभ' कहा जाता है।  - पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी है।  - मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा मिली थी। - प्रतिमा मिलने के बाद यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया।  - मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड ने करवाया था, मंदिर में एक स्वर्णस्तंभ भी है।  - मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। - भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाम मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था।  - इसका जिक्र 9 शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है।  - लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था। - 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास बताया।  - इसके बाद शाही परिवार ने(1729-1758)खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया।  - वर्मा ने मंदिर का पुनरुद्धार कराया। वह नेपाल की गंडक नदी के तटों से 12,008 शालाग्राम पत्थर लाए। - इन पत्थरों और अनोखे आयुर्वेदिक मिश्रण से 18 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया गया। - त्रावणकोर के राजाओं ने 1947 तक राज किया, आजादी के बाद इसे भारत में विलय कर दिया गया।  - लेकिन पद्मनाभ स्वामी मंदिर को सरकार ने अपने कब्जे में नहीं लिया।  - इसे त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहने दिया गया। - तब से पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट चलाता आ रहा है। 

देश के मंदिरों के पास मौजूद है 3 से 4 हजार टन सोना... प्राचीन मंदिरों के पास आभूषण, सोने के सिक्के और तमाम किस्म का चढ़ावा उपलब्ध है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार भारत के मंदिरों में करीब 3 से 4 हजार टन सोना पड़ा है। यह केंटकी के फोर्ट नॉक्स में सुरक्षित अमेरिकी सरकार के कुल सोने के भंडार से भी 2/3 गुना ज्यादा है। देश के बड़े मंदिरों में इस बेशुमार सोने को हिफाजत के लिए कहीं पर तहखाने बनाए गए हैं तो कहीं सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं।

देश के पांच सबसे अमीर मंदिर

तिरूपति बालाजी मंदिर- भारत के धनी मंदिरों की लिस्ट में पहले स्थान पर तिरुपति बालाजी मंदिर है। आंध्रप्रदेश स्थित तिरुपति के खजाने में लगभग 250-300 टन ज्वेलरी है (जिसमें जनता के चढ़ावे से साथ-साथ 1,000 साल पुराने प्राचीन सोने के गहने और अलग-अलग राजाओं द्वारा दिए गए आभूषण) साथ ही अलग-अलग बैंकों में मंदिर का 4,500 किलो सोना जमा और मंदिर के पास 1,000 करोड़ के रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट हैं

पद्मनाभस्वामी मंदिर- केरल की राजधानी थिरुअनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर में अरबों रुपए का खजाना मिलने का दावा किया गया है। इस मंदिर के बारे में यहां तक कहा गया कि इसके तहखानों में 1300 टन हीरे- जवाहरात, आभूषण और सोने के सिक्के मौजूद हैं। शयन मुद्रा में विराजमान विष्णु भगवान की मूर्ति वाला पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कहा गया। लेकिन अभी पूरी सम्पत्ति दुनिया के सामने नहीं आई है।

शिरडी का साईं बाबा मंदिर- भारत के मशहूर धनी मंदिरों में शिरडी के साईं बाबा मंदिर का नाम भी शामिल है। इस मंदिर में दर्शन के लिये हर दिन लाखों की संख्‍या में भक्‍त आते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस मंदिर में 376 किलो से ज्यादा सोना है। मंदिर के नाम पर करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ 3,000 किलो चांदी भी है।

वैष्णो देवी मंदिर- आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक माता वैष्णो देवी के खजाने में 193.5 किलो किलो से ज्यादा सोना है। माता के मंदिर की देखरेख करने वाली बोर्ड(श्राइन बोर्ड) ने एक आरटीआई से मांगी जानकारी में बताया था कि 2009 से 2014 के दौरान 193.54 किलो सोना भक्त ने चढ़ाया है।

सिद्धिविनायक मंदिर- सिद्धि विनायक के पास 160 किलो सोना मौजूद है। मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर करीब 200 साल पुराना है। यह भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। इस सोने की कीमत लगभग 67 मिलियन डॉलर यानी 417 करोड़ रुपये के करीब आंकी गई है।

जगन्नाथ मंदिर- ओडिशा के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित 12 सदी में बने जगन्नाथ मंदिर में 208 किलों के सोने के आभूषण हैं। लेकिन कुल कितना सोना है इसका पूरा अनुमान नहीं है।