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किसानों के खाते में 15-15 हजार प्रति एकड़ डालेगी सरकार !

मोदी सरकार इस बार अपना अंतिम और अंतरिम बजट पैस करने वाली है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यह चुनावी बजट भी हो सकता है। एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी यह साफ कर दिया है कि इसबार किसानों

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 जनवरी): मोदी सरकार इस बार अपना अंतिम और अंतरिम बजट पैस करने वाली है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यह चुनावी बजट भी हो सकता है। एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी यह साफ कर दिया है कि इसबार किसानों पर सरकार का ध्यान होगा। ऐसे में यह खबर आ रही है कि मोदी सरकार की तरफ से किसानों को इनकम सपोर्ट के रूप में प्रति हेक्टेयर 15,000 रुपये दिए जा सकते हैं।

सूत्रों ने बताया है कि सरकार को इस बारे में सुझाव भी दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि किसानों को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए अपफ्रंट सब्सिडी दी जाए। उर्वरक, बिजली, फसल बीमा, सिंचाई और ब्याज में रियायत सहित खेती-बाड़ी से जुड़ी हर तरह की सब्सिडी की जगह इनकम ट्रांसफर की व्यवस्था अपनाई जाए। तेलंगाना और ओडिशा ने किसानों को मदद देने के लिए कृषि कर्ज माफी के बजाय इनकम सपोर्ट का सिस्टम अपनाया है। एग्रीकल्चर सेक्टर को हर साल 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की इनपुट सब्सिडी मिलती है। देश में अगर खेती वाले रकबे को ध्यान में रखा जाए तो यह इनपुट सब्सिडी प्रति हेक्टेयर 15000 रुपये बनती है।

सूत्रों ने बताया कि सरकार एक ऐसा मैकेनिज्म बनाने पर विचार कर रही है, जिससे कृषि क्षेत्र की परेशानी दूर हो, सब्सिडी वाले यूरिया और बिजली का दुरुपयोग रुके और किसानों को आर्थिक आजादी मिले। सरकार का यह मानना है कि खेती-बाड़ी से आमदनी बढ़ाने से ही बात बनेगी। इसके अलावा सीधे किसानों को ही पैसा देने से उन्हें फसल चुनने की आजादी मिलेगी और फर्टिलाइजर हो या बिजली, केवल सब्सिडी वाले आइटम्स को ध्यान में रखकर काम नहीं करना होगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2015 में कहा था कि सरकार साल 2022-23 तक किसानों की आमदनी दोगुना करना चाहती है। इसके लिए 10 प्रतिशत सालाना से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत है, लेकिन कृषि उत्पादन की रफ्तार इससे पीछे चल रही है, जिसके कारण एग्रीकल्चरल इनकम में गिरावट आ रही है। अनुमान यह है कि खेती-बाड़ी से आमदनी इतनी नहीं होगी कि खेती पर निर्भर 53 प्रतिशत परिवारों को गरीबी से उबारा जा सके क्योंकि उनके पास कम जमीन है। इनमें से कई परिवारों के पास एक हेक्टेयर से कम जमीन है।

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