क्या 13 साल की तंजीम फहरा सकेगी कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा?

नई दिल्ली (12 अगस्त): कश्मीर में अगर पाकिस्तान और आईएसआईएस के झंडे फहराये जा सकते है तो भारत का तिरंगा क्यों नहीं ? ये अलफ़ाज़ हैं गुजरात की 8 वीं कक्षा की छात्रा तंज़ीम मेरानी के। जिसने भारत के 70 वें स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने की ठान ली है। तंज़ीम 11 अगस्त को अहमदाबाद से कश्मीर के लिए रवाना होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इस बच्ची को वहां तिरंगा फहराने की इजाजत मिलेगी? हालांकि बच्ची का परिवार उसके साथ है और उनका कहना है कि अगर इजाजत नहीं मिलती है तो वो भूख हड़ताल करेंगे।

तंजीम के स्कूल के चेयरमेन प्रदीप श्रीधर का कहना है कि उन्होंने पीएमओ को भी खत लिखा है ताकि तंजीम को लाल चौक पर तिरंगा फहराने की अनुमति मिल जाए।

- तंज़ीम ने ठान लिया है की इस 15 अगस्त को वो श्रीनगर के लालचौक जाकर तिरंगा फहराएगी, क्योंकि वो पाकिस्तान और आईएसआईएस को दिखा देना चाहती है की भारतीय भी किसी से कम नहीं है।

- तंज़ीम के पिता आमिर मेरानी अहमदाबाद के जुहापुरा में ईंटो के व्यापारी हैं। जिस तरह भट्ठी में ईंटे पकाई जाती है आमिर मेरानी ने भी अपनी बेटी को देशप्रेम की भठ्ठी में तपा कर भारतीय संस्कृति के अनुसार तैयार किया है।

- तंज़ीम ने तीन साल पहले जब अन्ना हज़ारे ने आंदोलन किया था उसी वक्त तंज़ीम ने भी तय कर लिया था की वो देश के लिए कुछ करना चाहती है, लेकिन उस वक्त उसकी उम्र काफी कम थी लेकिन इस बार जब तंज़ीम ने अपने पिता से कहा की वो लाल चौक में तिरंगा फहराना चाहती है। आये दिन पाकिस्तान और आईएस आईएस के झंडे फहराने और तिरंगे का अपमान होने की घटनाएं होती रहती है, तंज़ीम को लगा की अगर कश्मीर इंडिया का ही हिस्सा है तो वहां ये झंडे नहीं तिरंगा लहराना चाहिए। उसे अपने पिता की तरफ से भी ग्रीन सिग्नल मिल गया और जब स्कूल में तंज़ीम ने ये बात की तो स्कूल मैनेजमेंट भी उसे पूर्ण रूप से सपोर्ट करने के लिए तैयार हो गया।

- स्कूल मैनेजमेंट ने ना सिर्फ सपोर्ट किया बल्कि स्कूल परिसर में दो हज़ार स्टूडेंट्स के सामने उसका सम्मान भी किया जिससे दूसरे स्टूडेंट्स को भी प्रेरणा मिले।

- तंज़ीम के साथ उसके माता - पिता और छोटा भाई भी जायेंगे। तंज़ीम 12 अगस्त को दिल्ली और 14 अगस्त को श्रीनगर पहुंचेंगी और 15 अगस्त को लाल चौक में तिरंगा फहराएगी। तंज़ीम ने टीवी न्यूज में देखा था कि एक 16 साल की बच्ची जहानवी श्रीनगर जाने वाली है जिसके बाद उसको प्रेरणा मिली और उसने लाल चौक में तिरंगा फहराने की ठान ली।