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13 अगस्त 1947: लाहौर में मची थी चीख-पुकार, जिन्ना कर रहे थे कराची में जश्न

जयपुर (13 अगस्त): लार्ड माउंटबेटन ने 13 अगस्त 1947 को कराची जाकर पाकिस्तानी संविधान सभा को सत्ता सौंप दी थी, जिसके बाद जिन्ना नवनिर्मित पाकिस्तान देश के गर्वनर जनरल बने। इसी दौरान लाहौर में दंगे भड़क उठे थे। स्थिति और अधिक उग्र हो चुकी थी, चारों तरफ लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी।

आगजनी और तोडफ़ोड़ की घटनाएं चरम पर थीं। एक अनुमान के मुताबिक इन दंगों में सैकड़ों मासूमों की जान गई और लाखों रुपयों की हानि हुई। वहीं दूसरी तरफ कराची में पाकिस्तान की आजादी का जश्न मनाने की तैयारी जोरों-शोरों से की जा रही थी। इस जश्न में माउंटबेटन भी शामिल हुए थे। बताया जाता है कि यह पार्टी जिन्ना ने दी थी, जो देर रात तक चली और इस पार्टी में सब ने जमकर शराब पी।

कुछ अन्य प्रमुख घटनाएं... - मुस्लिम महिलाएं नए स्वतंत्र राष्ट्र पाकिस्तान में जाने के लिए दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने लगीं। - स्वतंत्रता के दो दिन पहले भारत ने सोवियत संघ के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने का फैसला किया। - लंबे समय से राजसी शासन के अधीन त्रिपुरा की महारानी कंचनप्रभा देवी ने भी भारतीय संघ में शामिल होने के लिए सहमति दी।

हम आजाद रहेंगे... - भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान ने स्वतंत्र रहने या अपनी खुद की यूनियन बनाने की घोषणा की। - उन्होंने अपनी बेटी आबिदा को भोपाल रियासत का शासक बन जाने को कहा।

55 हजार सैनिक दंगे नहीं रोक पा रहे, बंगाल को गांधीजी ने शांत करा दिया... 13 अगस्त को महात्मा गांधी कई दिनों से हिंदू-मुस्लिम दंगों की आग में झुलस रहे बंगाल में शांति अपील की कोशिशों में लगे थे। अंतत: वे कामयाब रहे। माउंटबेटन ने लिखा था कि पंजाब में मेरे पास 55 हजार सैनिक हैं, फिर भी दंगे हो रहे हैं। बंगाल में सिर्फ एक आदमी है, वहां कोई दंगा नहीं हो रहा।


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