जीएसटी पर एक और खुशखबरी दे सकती है सरकार!

नई दिल्ली(21 नवंबर): जीएसटी दरो में बदलाव के बाद सरकार एक और बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार जल्द ही 12 और 18 पर्सेंट के जीएसटी स्लैब को मिला सकती है। 28 पर्सेंट के स्लैब को सिर्फ डीमेरिट गुड्स के लिए रखा जाएगा। 

- चीफ इकनॉमिक अडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि देश में कभी भी सिंगल जीएसटी रेट नहीं हो सकता, लेकिन समय के साथ 0 और 5 पर्सेंट का एक स्लैब, 12-18 पर्सेंट का मिलाकर बना एक स्लैब और 28 पर्सेंट का डीमेरिट स्लैब हो सकता है। 

- उन्होंने अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में ये बात कही। उन्होंने कहा कि सीमेंट और वाइट गुड्स डीमेरिट कैटेगरी में नहीं आते, लेकिन सरकारी खजाने का ख्याल रखते हुए इनके बारे में फैसला लेने में केंद्र देरी कर रहा है। 

- चीफ इकनॉमिक अडवाइजर ने पिछले साल 15.5 पर्सेंट के रेवेन्यू न्यूट्रल रेट का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि जीएसटी कलेक्शन खराब नहीं रहे हैं और सरकार कुछ हफ्तों में ओवरऑल फिस्कल सिचुएशन का अंदाजा लगा लेगी।

-  उन्होंने बताया, 'जीएसटी के स्ट्रक्चर पर हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुझे 28 पर्सेंट वाला स्लैब कभी पसंद नहीं रहा, लेकिन इसे कुछ समय के लिए बनाया गया है। मुझे लगता है कि हम सिर्फ डीमेरिट गुड्स पर 28 पर्सेंट का टैक्स लगाएंगे। 0 और 5 पर्सेंट के बीच बड़ा टैक्स बेस है और हमें गरीबों के हितों की रक्षा करनी है, इसलिए इस मामले में अधिक प्रोग्रेस नहीं हो पाई है। हालांकि, 12 और 18 पर्सेंट के स्लैब को आगे चलकर मिलाया जा सकता है और उनके बदले एक रेट तय किया जा सकता है।' 

-  सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत में जीएसटी के लिए एक स्लैब संभव नहीं है। देश की मानसिकता समाजवादी है और इसकी जायज वजह भी है। उन्होंने कहा कि जमीन, रियल एस्टेट और नैचरल गैस को जल्द ही जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। वह बिजली को भी जल्द इसमें लाने के हक में हैं। 

- सुब्रमण्यन ने कहा, 'जीएसटी काउंसिल की पिछली मीटिंग के अजेंडे में जमीन और रियल एस्टेट शामिल थे, लेकिन इन पर बात नहीं हो पाई। मुझे लगता है कि इन्हें जल्द ही जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है।' 

- उन्होंने कहा कि बिजली को भी इसके दायरे में लाने से मेक इन इंडिया प्रोग्राम में मदद मिलेगी। सुब्रमण्यन ने कहा कि जीएसटी कलेक्शंस अनुमान के मुताबिक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स बेस को कितना बढ़ाया जा सकता है, यह जानकार सब हैरान हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी कलेक्शन में 12-13 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो रही है। राज्यों को भी रेवेन्यू लॉस नहीं होगा।