पाकिस्तान से तंग आकर 114 लोग बने भारतीय

नई दिल्ली(21 जुलाई): पाकिस्तान के 114 लोगों को भारत की नागरिकता मिल गई है। इन सभी लोगों को शुक्रवार को भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलेगा। 

- एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए 50 वर्षीय नंदलाल मेघानी ने कहा, '16 साल पहले पाकिस्तान के सिंध से मैं अपनी पत्नी और बेटी के साथ भारत आ गया था। भारत में नई शुरुआत करने के लिए वहां हमने अपना घर और बिजनस बेच दिया। हम भारत में आम लोगों की जिंदगी से प्रभावित थे और यहां आकर नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया। भारत में शरण लेने की प्रमुख वजह पाकिस्तान में अपराध की उच्च दर है। यही नहीं लगातार बढ़ते आतंकवाद के चलते पाकिस्तान के हमारे मुस्लिम दोस्तों ने भी हमें भारत में शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया।' मेघानी पाकिस्तान में ऑटो पार्ट्स का बिजनस करते थे।

- पाक से आए 59 वर्षीय किशनलाल अडानी ने कहा, 'मैं 2005 में पत्नी और 4 बेटों के साथ भारत आया था। मेरे बेटे कल आ रहे हैं और हम बहुओं समेत भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाइ करने की योजना बना रहे हैं।' अडानी पाकिस्तान के सिंध सूबे के थारपकड़ कस्बे में जनरल स्टोर चलाते थे। भारत में अपने बेटों के साथ उन्होंने बर्तन की दुकान शुरू की है। 

- भावुक अडानी ने बताया, 'मैं अब भी अपने उस घर और दोस्तों को याद करता हूं, जिन्हें छोड़कर हम यहां आ गए हैं। हालांकि आतंकवाद के चलते हमारे लिए बचे रहना मुश्किल हो गया था। जब हम बाहर निकलते थे तो सोचते थे कि वापस घर आ भी पाएंगे या नहीं।'  

पाकिस्तान के 114 लोगों को भारत की नागरिकता मिल गई है। इन सभी लोगों को शुक्रवार को भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलेगा। 

- एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए 50 वर्षीय नंदलाल मेघानी ने कहा, '16 साल पहले पाकिस्तान के सिंध से मैं अपनी पत्नी और बेटी के साथ भारत आ गया था। भारत में नई शुरुआत करने के लिए वहां हमने अपना घर और बिजनस बेच दिया। हम भारत में आम लोगों की जिंदगी से प्रभावित थे और यहां आकर नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया। भारत में शरण लेने की प्रमुख वजह पाकिस्तान में अपराध की उच्च दर है। यही नहीं लगातार बढ़ते आतंकवाद के चलते पाकिस्तान के हमारे मुस्लिम दोस्तों ने भी हमें भारत में शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया।' मेघानी पाकिस्तान में ऑटो पार्ट्स का बिजनस करते थे।

- पाक से आए 59 वर्षीय किशनलाल अडानी ने कहा, 'मैं 2005 में पत्नी और 4 बेटों के साथ भारत आया था। मेरे बेटे कल आ रहे हैं और हम बहुओं समेत भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाइ करने की योजना बना रहे हैं।' अडानी पाकिस्तान के सिंध सूबे के थारपकड़ कस्बे में जनरल स्टोर चलाते थे। भारत में अपने बेटों के साथ उन्होंने बर्तन की दुकान शुरू की है। 

- भावुक अडानी ने बताया, 'मैं अब भी अपने उस घर और दोस्तों को याद करता हूं, जिन्हें छोड़कर हम यहां आ गए हैं। हालांकि आतंकवाद के चलते हमारे लिए बचे रहना मुश्किल हो गया था। जब हम बाहर निकलते थे तो सोचते थे कि वापस घर आ भी पाएंगे या नहीं।'