चीन में औद्योगिक संकटः एक साल में 110 जापानियां कंपनी दीवालिया घोषित

नई दिल्ली (14 फरवरी): साउथ चाइना सी विवाद और हर दिन महंगी होती मजदूरी की वज़ह से चीन में काम कर रही जापान की 110 कंपनियां दीवालिया घोषित हो चुकी हैं। यह जानाकारी तोक्यो शोको रीसर्च की इस रिपोर्ट में दी गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक अब ये कंपनियां म्यांमार बांग्लादेश, लाओस और कंबोडिया में नया मार्केट तलाश रही हैं। जापान, चीन में सबसे ज्यादा निवेश करने वाला देश है। जापानी कम्पनियों के इस तर दीवालिया होना चीन की अर्थव्यवस्था केलिए सबसे बड़ा खतरा है।  जापान की सभी बड़ी ऑटोमोबाइल फर्म चीन के मार्केट में काम कर रही हैं। इन दोनों देशों के बीच 2015 में राजनीतिक तनाव होने के बावजूद 303 बिलियन यूएस डॉलर का व्यापार हुआ। 

चीन में इन जापानी कंपनियों के दिवालिया होने से 1,638 नौकरियां भी चली गई हैं। सेक्टर के हिसाब से दिवालिया हुई इन कंपनियों में 63 होलसेल कंपनी थीं जबकि 33 अन्य मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हुई थीं। सबसे ज्यादा परिधान बनाने वाली फर्में दिवालिया हुई है।इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले मिशुहिरो हरादा ने कहा, 'अभी चीन में बढ़ती लेबर कॉस्ट चिंता का विषय है। जापान की परिधान बनाने वाली कंपनियां सस्ती मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट के कारण चीन की ओर आकर्षित हुई थीं।' जापान टेक्सटाइल फेडरेशन के प्रवक्ता सदायोशी तमुरा ने कहा, 'चीन में खुद को दिवालिया घोषित कर चुकीं कंपनियां अपने लिए नए बाजारों जैसे म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए फ्रेश कैपिटल भी जुटाना चाहती हैं ताकि कम कॉस्ट में मैन्युफैक्चरिंग करना चाहती हैं।' हालांकि कुछ ऐनालिस्टों का मानना है कि केवल बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ही नहीं बल्कि बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए भी कंपनियां चीन छोड़ना चाहती हैं।