जब इंदिरा ने पाक युद्धबंदियों को छोड़ने से किया था मना

नई दिल्ली (20 नवंबर): इंदिरा गांधी को एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है, जो एक बार किसी बारे में फैसला कर लें तो उससे पीछे नहीं हटती थी। ऐसी ही एक घटना के बारे में लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह ने जिक्र किया है, जिसमें इंदिरा में 93 हजार पाक युद्धबंदियों को रिहा करने की अपील को ठुकरा दिया था।

खुशवंत सिंह के साथ भूतपूर्व राजदूत गगन बिहारी मेहता, प्रसिद्ध उर्दू लेखक कृश्नचंदर और ख्वाजा अहमद अब्बास इस बारे में जब इंदिरा से मिलने गए थे तो उन्होंने खुशवंत सिंह को करारा जवाब देते हुए कहा कि मिस्टर सिंह, आपने पाकिस्तान के युद्धबंदियों के बारे में जो लिखा है, वह सरकार के लिए अत्यधिक परेशानी का सबब बना है।

इसपर खुशवंत सिंह ने कहा कि यही तो मेरा उद्देश्य था। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने आपकी सरकार को परेशानी में डाला, लेकिन इंदिरा गांधी ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि आप अपने को शायद महान संपादक मानते हैं, पर आपको राजनीति का क ख ग भी नहीं मालूम। इस पर खुशवंत का जवाब था, ‘मैं मानता हूं कि मैं राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानता, लेकिन नैतिकता के बारे में जरूर जानता हूं, जो नैतिक दृष्टि से गलत है, वह राजनीतिक दृष्टि से सही कैसे हो सकता है?’ इस पर इंदिरा जी ने कहा कि ‘उपदेश के लिए धन्यवाद!’

अब गगन बिहारी की बारी थी। वयोवृद्ध मेहता बोलना शुरू ही कर रहे थे कि श्रीमती गांधी ने बड़ी रुखाई से उन्हें टोकते हुए कहा कि ‘मैं आपसे कुछ भी सुनना नहीं चाहती। मुझे आप के अमेरिका समर्थक दृष्टिकोण के बारे में पता है।’ इस पर बुजुर्ग गगन बिहारी ने अपने को अत्यधिक अपमानित महसूस किया। कृश्नचंदर और अब्बास की बातों पर तो उन्होंने कोई ध्यान ही नहीं दिया।