INSIDE STORY: सऊदी अरब में क्यों हैं भारतीय बेहाल, क्यों हुए रोटियों तक को मुहाल?

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (1 अगस्त): सऊदी अरब में रह रहे करीब 10 हजार भारतीयों के लिए भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। उनके मालिकों ने उन्हें 8 महीने से तन्ख्वाह भी नहीं दी है। ऐसे में भारत सरकार इन लोगों की मददगार बनके सामने आई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने खुद इस मामले पर नजर रखी हुई हैं। सरकार ने स्थानीय भारतीयों के मदद से इन लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया है। साथ ही 10 हजार भारतीयों की ''एयर लिफ्टिंग'' की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। जानिए सऊदी में भूख से बेहाल क्यों हुए भारतीय, क्यों गवानी पड़ी नौकरीयां... 

सऊदी अरब और कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीयों की नौकरी छिनी, 10 हजार लोगों का खाने का संकट - सऊदी अरब और कुवैत में बड़ी भारतीयों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है, इसके चलते उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। - यह लोगों जिन कंपनियों में काम कर रहे थे, उन कंपनियों के मालिकों ने अपनी-अपनी कंपनी और फैक्ट्री बद कर दी है। - साथ ही कंपनी और फैक्ट्री मालिकों ने उनके बकाये वेतन का भुगतान भी नहीं किया है। - विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मुताबिक सऊदी अरब में करीब 10,000 लोगों के सामने खाने का भी संकट है। - विदेश मंत्री ने सऊदी अरब में बसे 30 लाख भारतीय समुदाय से अपने परेशान भाइयों की मदद करने की अपील की है। - साथ ही उन्होंने सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से बेरोजगार भारतीय मजदूरों को मुफ्त में राशन मुहैया कराने का आदेश दिया है। - उन्होंने कहा, 'मैं आश्वस्त करना चाहती हूं कि सऊदी में बेरोजगार हो गया कोई भी भारतीय कामगार भूखा नहीं रहेगा। मैं हर घंटे इस पर नजर रख रही हूं।' - विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक समस्या को सुलझाने के लिए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह को सऊदी अरब जा रहे हैं। - वह कुवैत और सऊदी अरब की अथॉरिटीज से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे।   - फिलहाल कितने भारतीयों को सऊदी और कुवैत में अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, इस बात की पूरी जानकारी अभी नहीं मिली है। सुषमा स्वराज के ट्वीट "सऊदी और कुवैत में भारतीय नागरिकों को अपने काम और वेतन से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और सऊदी में ‘‘मामले ज्यादा खराब हैं.’’ "सउदी और कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीयों ने अपनी नौकरियां गवाई हैं और उनके नियोक्ताओं ने उन्हें वेतन नहीं दिए हैं और अपने कारखाने बंद कर दिए हैं.’’   ‘‘मेरे सहकर्मी वीके सिंह इन मामलों को सुलझाने के लिए सउदी जाएंगे और एमजे अकबर कुवैत और सउदी के अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाएंगे.’’  ‘‘मैं सउदी में 30 लाख भारतीयों से अपील करती हूं. कृपया अपने साथी भाइयों-बहनों की मदद कीजिए.’’ ‘‘मैं आपको यकीन दिलाती हूं कि सउदी अरब में नौकरी गंवाने वाले किसी भारतीय को भूखा नहीं रहना पड़ेगा. मैं पूरे मामले की निगरानी हर घंटे कर रही हूं.’’ ‘‘हमने रियाद में भारतीय दूतावास से कहा है कि वह सऊदी अरब में बेरोजगार भारतीय कामगारों को मुफ्त राशन मुहैया कराए .’’ किसी भी भारतीय को भूखे नहीं रहने दिया जाएगा- उन्होंने कहा कि विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर सऊदी और कुवैत प्रशासन से इस मुद्दे पर बात करेंगे। सुषमा ने एक अन्य ट्वीट में कहा, मैं आपको आश्वस्त करती हूं कि सऊदी अरब में बेरोजगार किसी भी भारतीय को भूखे नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, मैं हर घंटे इस पर नजर रख रही हूं। इसके बाद ट्वीट करने वाले व्यक्ति ने भोजन के लिए कतार में खड़े भारतीयों के चित्र ट्वीट किए। फिर जनरल के कंधों पर जिम्‍मेदारी... पहले यमन फिर सूडान और अब सऊदी अरब, विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह एक बार फिर से एक बड़े रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के लिए तैयार हैं जिसमें दांव पर लगी है 10,000 भारतीयों की जिंदगी। इस समय सऊदी अरब में 10,000 भारतीय फंसे हुए हैं और इनकी हालत इतनी खराब है कि खाने तक के लाले हैं। इन भारतीयों ने ट्विटर का सहारा लिया और विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मदद की अपील की। ऐसे में एक बार फिर विदेश राज्‍य मंत्री जनरल वीके सिंह इन भारतीयों के लिए उम्‍मीद की किरण बनकर उभरे हैं। अगर आपको याद हो तो अप्रैल 2015 में भारत ने यमन में बसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन राहत की शुरुआत की थी। इसकी अगुवाई जनरल वीके सिंह ने ही की थी।

 

सऊदी अरब की स्थिति काफी खराब- सुषमा ने ट्वीट किया, सऊदी अरब और कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं। नियोक्ताओं ने वेतन नहीं दिए और अपने कारखाने बंद कर दिए। उन्होंने कहा, मेरे सहयोगी जनरल वीके सिंह इस तरह के सभी मामले सुलझाने के लिए सऊदी अरब पहुंच रहे हैं। सुषमा ने कहा कि कुवैत की स्थिति नियंत्रण लायक है, लेकिन सऊदी अरब की स्थिति काफी खराब है। इस साल सऊदी अर्थव्यवस्‍था की पिछले तीन सालों में सबसे धीमी रफ्तार है... दुनिया के सबसे बड़े आयल एक्सपोर्टर ने क्रूड का उत्पादन बढ़ाया और अधिक रिफाइन उत्पादों का निर्यात किया इससे साल की पहली तिमाही में ऑयल सेक्टर 5.1 फीसद तक बढ़ा। लेकिन नॉन ऑयल सेक्टर 0.7 फीसद घट गया जो पिछले पांच सालों का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। सऊदी नीति निर्माताओं के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि पिछले माह घोषित सस्ते तेल से सामना करने में मदद के लिए एक महत्वाकांक्षी सुधार योजना की घोषणा की गयी। सऊदी अरब में पिछले साल से आर्थिक हालात थे खराब, इसलिए उठाने पड़े यह कदम... - इसी साल जून में तेल पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए सऊदी अरब ने अहम सुधारों की घोषणा की थी। - सऊदी के मंत्रिमंडल नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोगाम यानी राष्ट्रीय कायाकल्प कार्यक्रम की घोषणा की थी। - नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोगाम सऊदी विजन 2030 का हिस्सा है। - सऊदी अरब कच्चे तेल आधारित अर्थव्यवस्था की राह से निकल कर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना पर निकल पड़ा है। - कच्चे तेल आधारित अर्थव्यवस्था से अलग हटकर वर्ष 2020 तक लगभग 4.5 लाख गैर-सरकारी नौकरियां पैदा की जाएंगी। - इसके अलावा गैर तेल आधारित राजस्व को बढ़ाने के साथ ही मजदूरी की सरकारी दरों को कम किया जाएगा, इसमें छटनी महत्वपूर्ण होगी। - ये सुधार सऊदी के शाह सलमान के 30-वर्षीय बेटे नायब शहजादा मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में लागू किए जाएंगे। - इन सुधारों को लागू करने का लक्ष्य विश्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश को सरकारी नियंत्रण से हटकर मजबूत निजी क्षेत्र वाली अर्थव्यवस्था बनाना है। - सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में बदलाव के कई मॉडलों पर चर्चा होती रही। इनमें एक था यूएई का मॉडल और दूसरा मॉडल मलयेशिया का। - पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमिरात (यूएई) का मॉडल के मुताबिक पेट्रोल सब्सिडीज में कटौती कर क्रांतिकारी बदलाव लाना । - दूसरा मॉडल मलयेशिया का है जिसने 2010 में कमोडिटी एक्सपोर्ट्स से हटकर कई चीजें अपनाने तथा ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करने के कदम उठाना। सऊदी अरब को कितना हो रहा था नुकसान... - अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिर रही कीमतों और निर्माण क्षेत्र में भारी सुस्ती के कारण ये हालत पैदा हुए हैं। - अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 30 डॉलर प्रति बैरल पर गिर रहा था, जो सऊदी के अनुमान की आधी कीमत थी। - यही नहीं सऊदी के सालाना बजट में करीब 100 अरब डॉलर (6.67 लाख करोड़) का घाटा हो रहा था - इस घाटे ने सऊदी किंगडम को चिंता में डाल दिया और क्रांतिकारी बदलाव की जरूरतों को मजबूती प्रदान की। - सस्ते कच्चे तेल और यमन के साथ पिछले एक साल से चल रहे युद्ध के कारण आर्थिक मंदी का शिकार हो रहा था साऊदी। - दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पाद देश सऊदी अरब में निमार्णाधीन बड़े-बड़े प्रोजेक्टों पर ब्रेक लग गया था। - हज यात्रा के दौरान मक्का में हुए क्रेन हादसे के कारण सऊदी सरकार पहले ही सउदी बिन लादेन जैसी नामी कंस्ट्रक्शन कंपनी पर ताला जड़ चुकी थी। - इस साल अप्रैल में सउदी बिन लादेन ने 20 हजार भारतीय वापस भेज दिए थे। - सरकारी प्रोजेक्टों का ठेका लेने वाली कंपनी सऊदी ओजर भी अपने कामगारों को पगार तक नहीं दे पा रही थी। - कभी सऊदी ओजर कंपनी का डंका बजा करता था। जून में इस कंपनी ने 385 भारतीय ड्राइवर भारत वापस भेज दिए, इनमें अधिकतर पंजाब से हैं। - हालांकि यह समस्या पिछले तीन सालों से जारी है 2013 में 1 लाख 40 भारतीय कामगारों ने सऊदी छोड़ने के लिए भारतीय कॉन्सलेट से गुहार लगाई थी। - क्योंकि सऊदी अरब ने गैरकानूनी ढंग से रहने वाले विदेशियों को पकड़ने के लिए 2013 में निताकत नीति को सख्ती से लागू किया था। - बीते दशक में सऊदी अरब में जबरदस्त आर्थिक ग्रोथ के चलते दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया से बड़े पैमाने पर लोग वहां रोजगार के लिए पहुंचे थे। - आमतौर पर ऑइल इंडस्ट्री में कम मजदूरी वाले पदों, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर में मिडिल मैनेजमेंट पदों पर गैर सऊदी लोगों की बड़ी संख्या है। - सऊदी के आधिकारिक डेटा के मुताबिक देश की 3 करोड़ 80 लाख की जनसंख्या में करीब एक करोड़ लोग विदेशी हैं। - सऊदी अरब के सेंट्रल बैंक के मुताबिक नौकरी के लिए दूसरे देशों से आने वाले लोगों ने 2015 की तीसरी तिमाही में 9 अरब डॉलर की धनराशि घर भेजी। - सऊदी अरब की जीडीपी पर भी तेल की कीमतों का बहुत असर हुआ था।  - 2006 से 2015 तक 5 पर्सेंट की दर से बढ़ने वाली सऊदी अर्थव्यवस्था का आंकड़ा इस साल 2 पर्सेंट पर आ ठहरा। खाड़ी के देशों में कितने रहते हैं भारतीय... 25 लाख से भी ज्यादा भारतीय कामगार - गौरतलब है कि अरब देशों में सऊदी अरब ही मात्र ऐसा देश है जहां 25 लाख से भी ज्यादा भारतीय कामगार हैं। - पंजाब, यूपी, आंध्र और राजस्थान से ज्यादातर ड्राइवर, आपरेटर, प्लंबर, गार्ड, टायर मैन, इलेक्ट्रिशियन और वेल्डर वहां कंपनियों में काम कर रहे हैं। - मुंबई की बड़ी मैनपावर रिक्रूटमेंट एजेंसियां जो हर महीने 5000 अरब देशों की एयर टिकटें बनती थी, वह अब कम होकर 50 से 100 के बीच ही रह गई हैं। सऊदी अरब- 17, 89,000 कुवैत- 5, 79, 390 बेहरीन- 3, 50, 000 कत्तर- 5,00, 000 यूएई- 17, 02, 911 ओमान- 5, 57, 713