हर साल 1000 दलितों पर यहां होता है अत्याचार

नई दिल्ली (21 जुलाई): एक आरटीआई में देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल गुजरात का एक घिनौना चेहरा सामने आया है। खबर के अनुसार, यहां पर हर साल एक हजार दलित अत्याचार का शिकार हो रहे हैं। यहीं नहीं साल में औसतन 20 की हत्या हो रही है, तो 45 दलित महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं।

आईटीआई में हुआ खुलासा: - दस सालों में 202 दलितों की हत्या की गई है, जबकि 572 पर हमले हुए हैं। - 453 महिलाओं से दुष्कर्म किया गया है, जबकि 74 को आग से नुकसान पहुंचाया गया है। - 9504 दलितों ने आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज कराएं हैं। जबकि पीसीआर एक्ट के तहत 34 मामले दर्ज हुए हैं। - दस सालों में 10 हजार 839 मामले दर्ज हुए हैं। जो दर्शाता है कि हर साल औसतन 1083 दलितों पर गुजरात में अत्याचार हो रहा है। - राज्य में तीन सालों से ऊपर 1257 मामले लंबित हैं। जबकि जिन्हें दर्ज हुए 10 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं ऐसे 522 मामले हैं। एक साल से ऊपर के 1140 मामले लंबित हैं।

न्याय दिलाने में पीछे गुजरात: - दलितों को न्याय दिलाने व एट्रोसिटी एक्ट के क्रियान्वयन में गुजरात अपने पड़ोसी प्रदेश राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी काफी पीछे है। - इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुजरात में अप्रेल-2015 से सितंबर-2015 के दौरान 306 मामलों का निपटारा किया गया है, जिसमें से महज 12 मामले ही साबित हुए हैं, जिनमें सजा हुई है। सजा का प्रतिशत केवल 3.92 है। - वर्ष 2011 में एससी पर दर्ज मामलों में सजा का प्रतिशत 2.10 प्रतिशत था, जो वर्ष 2012 में 7.80 प्रतिशत रहा।

- मप्र में साबित होने वाले मामलों का प्रतिशत 29 प्रतिशत है। - राजस्थान में तो ये 40 प्रतिशत से भी अधिक है।