'मिसाइलमैन' की पुण्यतिथि: जानिए 10 बातें जो उन्हें बनाती थीं- 'अनूठी शख्सियत'

नई दिल्ली (27 जुलाई): दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की आज पहली पुण्यतिथि है। एक साल पहले 27 जुलाई 2015 की शाम उनका निधन हो गया था। मिसाइलमैन के नाम से मशहूर रहे डॉ. कलाम अपने सादगी की वजह से जाने जाते थे। 2002 से 2007 तक देश के 11वें राष्ट्रपति रहते हुए उन्होने राष्ट्रपति भवन को आम लोगों के लिए खोला था। डॉक्टर कलाम हर वर्ग के लोगों के बीच खासे मशहूर थे।

आइए जानते हैं डॉक्टर कलाम के बारे में 10 खास बातें:

लाइफ स्टाइल : डॉक्टर कलाम को जो भी देखता था, उनके हेयर स्टाइल पर जरूर गौर करता। जो हमेशा ही लोगों के लिए चर्चा का विषय जरूर रहता था। एक वैज्ञानिक और एक राष्ट्रपति के तौर पर उन्होने देश को अतुल्य योगदान देकर सेवा की।

डॉ कलाम शाकाहारी थे: वह मदिरापान और मांसाहार से परहेज करते थे।

1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के सलाहकार रहे: इस दौरान केंद्र की वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए औऱ भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देश में शामिल हो गया। 

कभी रिटायर नहीं हुए: राष्ट्रपति पद पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से कलाम शिलांग, अहमदाबाद और इंदौर के भारतीय प्रबंधन संस्थानों तथा देश और विदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अतिथि प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।

राष्ट्रपति भवन के दरवाजे सबके लिए खोले: समाज के सभी वर्गों और विशेषकर युवाओं के बीच प्रेरणा स्रोत बने डॉ कलाम ने राष्ट्राध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जन के लिए खोल दिए जहां बच्चे उनके विशेष अतिथि होते थे।

भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में योगदान : कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी से स्नातक करने के बाद भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और फिर उसके बाद रक्षा शोध और विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़ गए।

समाचारपत्र विक्रेता के रूप में करियर : कलाम के पिता के पास कई नौकाएं थीं जिन्हें वह स्थानीय मछुआरों को किराए पर देते थे। लेकिन उन्होंने अपना खुद का करियर समाचारपत्र विक्रेता के रूप में शुरू किया था।

20 दया याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं लिया : बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में कलाम को 21 दया याचिकाओं में से 20 के संबंध में कोई फैसला नहीं करने को लेकर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। कलाम ने अपने पांच साल के कार्यकाल में केवल एक दया याचिका पर कार्रवाई की और बलात्कारी धनंजय चटर्जी की याचिका को नामंजूर कर दिया जिसे बाद में फांसी दी गयी थी। उन्होंने संसद पर आतंकवादी हमले में दोषी करार दिए जाने के बाद मौत की सजा पाने का इंतजार कर रहे अफजल गुरु की दया याचिका पर फैसला लेने में देरी को लेकर अपने आलोचकों को जवाब दिया और कहा कि उन्हें सरकार की ओर से कोई दस्तावेज नहीं मिला। गुरु को बाद में फांसी दे दी गयी थी।

लाभ के पद संबंधी विधेयक को मंजूरी देने से इनकार: कलाम ने लाभ के पद संबंधी विधेयक को मंजूरी देने से इनकार करके यह साबित कर दिया था कि वह एक ‘‘रबर स्टैम्प’ संवैधानिक प्रमुख नहीं हैं। यह उनकी ओर से एक असंभावित कदम था जिसने राजनीतिक गलियारों विशेष रूप से कांग्रेस और उसके वामपंथी सहयोगियों के पैरों तले की जमीन खिसका दी थी। अगले दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति को यह मामला समझाने गए और किसी प्रकार ‘‘अयोग्यता निवारण ( संशोधन) विधेयक 2006 ’ पर उनकी मंजूरी हासिल की।

संवाद कुशलता: अपनी अनोखी संवाद कुशलता के चलते कलाम अपने भाषणों और व्याख्यानों में छात्रों को हमेशा शामिल कर लेते थे। व्याख्यान के बाद वह अक्सर छात्रों से उन्हें पत्र लिखने को कहते थे और प्राप्त होने वाले संदेशों का हमेशा जवाब देते थे।