इस्लामिक चरमपंथियों को अमेरिका से बाहर करेंगे डोनाल्ड ट्रंप, 7 मुस्लिम देशों की एंट्री पर बैन

नई दिल्ली ( 29 जनवरी ): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामिक आतंकवाद पर कार्रवाई को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। ट्रंप ने एक ऑर्डर पर साइन किए हैं। इसके मुताबिक, इस्लामिक कट्टरपंथियों को अमेरिका से बाहर खदेड़ दिया जाएगा। साथ ही अमेरिका आने वाले रिफ्यूजियों पर भी लगाम लगाई जाएगी। यह भी कहा गया है कि इराक, ईरान, सीरिया, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन जैसे 7 मुस्लिम देशों के विजिटर्स को फिलहाल वीजा नहीं मिलेगा।

ट्रंप ने कहा, "हम एक नया कानून बनाने जा रहे हैं। इसके मुताबिक इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को देश को बाहर खदेड़ दिया जाएगा। हम उन्हें देश में देखना ही नहीं चाहते।" ट्रंप ने शुक्रवार को डिफेंस डिपार्टमेंट पेंटागन का पहली बार दौरा किया था। उन्होंने कहा, "मैं भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश पर कोई खतरा नहीं है। हमारे सैनिक दुनियाभर में लड़ रहे हैं। मैं बस ये कहना चाहता हूं कि जो लोग देश में रह रहे हैं वे देश को सपोर्ट करें और लोगों से प्यार करें।" "हम न तो 9/11 की सीखें भूलेंगे और न ही उन जवानों को जिन्होंने पेंटागन में जान गंवा दी थी। वो हमारे बेस्ट जवान थे। हम उन्हें शब्दों से श्रद्धांजलि नहीं दे सकते।"

क्या है एग्जीक्यूटिव ऑर्डर?

ट्रम्प ने 'प्रोटेक्शन ऑफ द नेशन फ्रॉम फॉरेन टेररिस्ट एंट्री इनटू द यूनाइटेड स्टेट्स' नामक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। इसके मुताबिक, 'कई विदेशी मूल के आतंकी 9/11 के बाद से आतंकवाद फैलाने के आरोप में सजा पा चुके हैं। इनमें से कई लोग तो विजिटर, स्टूडेंट, इम्प्लॉइमेंट वीजा या फिर रिफ्यूजी बनकर यूएस में दाखिल होते हैं।''कुछ देशों में जंग जैसे हालात, आपदा या अशांति के चलते स्थिति खराब हो चुकी है। लिहाजा आतंकी किसी भी सूरत में अमेरिका में एंट्री करने की कोशिश करेंगे।''अब वीजा देते वक्त ये ध्यान रखा जाएगा कि इससे अमेरिकियों को कोई दिक्कत न हो। अमेरिकी संविधान और कानून से छेड़छाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।'

यूएस रिफ्यूजी एडमिशन्स प्रोग्राम को 120 दिन के लिए बंद कर दिया गया है। ये तभी शुरू किया जाएगा जब ट्रम्प कैबिनेट के मेंबर्स उसकी अच्छी तरह जांच कर लेंगे। ऑर्डर के मुताबिक, इराक, ईरान, सीरिया, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के लोग भी 90 दिन तक अमेरिका में एंट्री नहीं ले सकेंगे। उन्हें वीजा नहीं मिलेगा।