इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- #TripleTalaq असंवैधानिक, मुस्लिम महिलाओं के साथ क्रूरता, तीन तलाक पर क्यों मचा है घमासान, जानिए

डॉ. संदीप कोहली,नई दिल्ली (8 दिसंबर): ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर देश में चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है तीन तलाक असंवैधानिक और महिला अधिकारों के खिलाफ है। यही नहीं हाईकोर्ट ने तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ क्रूरता भी बताया है। खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी पर्सनल ला बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दो मुस्लिम महिलाओं हिना और उमरबी की याचिका पर सुनाया है। यह फैसला जस्टिस सुनीत कुमार की एकल पीठ ने दिया है। 24 वर्षीय हिना की शादी 53 साल के एक शख्स से हुई थी, जिसने उसे बाद में तलाक दे दिया। वहीं, उमरबी का पति दुबई में रहता है, जिसने उसे फोन पर तलाक दे दिया था।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से तीन तलाक को लेकर केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड आमने-सामने हैं। जहां एक ओर इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)ने कड़ा रूख अपनाया है। वहीं पीएम मोदी भी एक रैली में केंद्र सरकार का रुख साफ करते हुए कह चुके हैं कि मुस्लिम माताओं और बहनों को समानता का अधिकार मिलना चाहिए, उन पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के महोबा में बुंदेलखंड परिवर्तन महारैली में पीएम मोदी ने तीन तलाक का समर्थन करने वाले लोगों से सवालिया लहजे में पूछा था, क्या टेलीफोन पर तीन तलाक देकर हमारी मुस्लिम बेटियों और महिलाओं की जिंदगी आगे चलेगी? जिसके बाद तीन तलाक को लेकर पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने मामले को और तूल दे दिया है।

क्या कहा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने...

- तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

- तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ क्रूरता है।

- कुरान में कहा गया कि जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो तभी तलाक दिया जा सकता है।

- लेकिन धर्म गुरुओं ने इसकी गलत व्याख्या की है।

- कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।

क्या है ट्रिपल तलाक पर पूरा विवाद...

- तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही सुनवाई चल रही है।

- चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर सुनवाई के दौरान कह चुके हैं।

- कोर्ट तय करेगा कि अदालत किस हद तक पर्सनल लॉ में दखल दे सकती है।

- क्या उसके कुछ प्रावधानों से मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।

- कोर्ट केंद्र समेत इस मामले में सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को भी कह चुकी है।

- इसी साल मार्च में उत्तराखंड की शायरा बानो की भी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की थी।

- शायरा बानो ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी।

- अप्रैल में भी कोर्ट ने हरियाणा की एक मुस्लिम महिला के मामले में स्वत संज्ञान लिया था।

- साथ ही मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर गंभीर टिप्पणी की थी।

- कोर्ट ने इस मसले पर टीवी पर हो रही बहस पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था।

- इसके अलावा कोर्ट 1986 का शाहबानो मामल में फैसला दे चुका था।

- जिसके बाद राजीव गांधी सरकार ने कोर्ट के फैसले उलट कर कानून बना दिया था।

- मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट 1986 लागू किया था।

- शाहबानो मामले में पर्सनल लॉ बोर्ड की अगुवाई में देश भर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक पर खोल रखा है मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा...

- ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार का विरोध गलत है।

- तीन तलाक पर आयोग का बहिष्‍कार करेगा बोर्ड।

- यूनिफॉर्म सिविल कोड भारतीय संविधान के खिलाफ है।

- भारत जैसे विविधता में एकता वाले देश की विविधता बरकरार रहनी चाहिए।

- संविधान में हमें अलग-अलग तरीके से, अपने तरीके से रहने का अधिकार है।

- अमेरिका में जितने राज्य हैं उनका अलग-अलग पर्सनल लॉ है

- अमेरिका में पर्सनल लॉ को लेकर कोई विवाद नहीं है।

- हमारी हुकूमत हर बात में अमेरिका की पिछलग्गू बनती है।

- पर इस मामले में नहीं देख रही है कि वहां क्या हो रहा है।

- देश के भीतर लड़ाई की तैयारी में है मोदी सरकार।

- ढाई साल की नाकामियां छुपाने की कोशिश कर रही है सरकार।

- सरहद तो संभल नहीं रही और अंदरुनी जंग के हालात पैदा किए जा रहे हैं।

- पहले दुश्‍मनों से निपटे मोदी सरकार, अंदर दुश्‍मन न बनाएं।

- ये बात सिर्फ मुसलमानों की तरफ से नहीं, सिख, इसाइयों की तरफ से भी है।

- हम हुकूमत के इस हलफनामे की मुखालफत करेंगे, पूरा मुल्क हमारे साथ है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा था...

- पिछले शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था।

- हलफनामे में तीन तलाक को खत्म करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत की थी।

- केंद्र ने कहा है भारत में जारी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह का इस्लाम में रिवाज नहीं है।

- तीन बार तलाक कहना महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, कई मुस्लिम देशों ने इसमें सुधार किए हैं।

- ईरान, मिस्र, इंडोनेशिया, तुर्की, मोरक्को, बांग्लादेश और पाकिस्तान की दिया था उदाहरण।

दुनिया के कई इस्लामिक देशों में भी बैन है ट्रिपल तलाक...

- पाकिस्तान में यह 1961 से ‘तीन तलाक’ बैन है।

- बांग्लादेश ने 1971 से ही इसे बैन कर दिया था।

- मिस्र 1929, तुर्की 1926 से तीन तलाक की इजाजत नहीं है।

- सूडान 1935, सीरिया 1953, इंडोनेशिया 1974, जोर्डन 1951।