अलोक वर्मा ने फायर सर्विसेज के डीजी का चार्ज लेने से किया इनकार,दिया इस्तीफा

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 जनवरी): आलोक वर्मा ने नई जिम्मेदारी संभालने से इनकार कर दिया है। वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाकर फायर सर्विसेज का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था लेकिन शुक्रवार को उन्होंने इसका चार्ज लेने से मना कर दिया और इस्तीफा दे दिया है। आलोक वर्मा को हटाए जाने के एक दिन बाद एम. नागेश्वर ने शुक्रवार को सीबीआई डायरेक्टर पद का कार्यभार एक बार फिर से संभाल लिया। पद संभालते ही राव ने जहां वर्मा द्वारा पिछले 2 दिनों में लिए गए ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत सभी फैसलों को रद्द कर दिया और 8 जनवरी की स्थिति को बहाल कर दिया। बता दें कि डायरेक्टर पद से वर्मा की छुट्टी के बाद नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी दी गई है।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर बहाल किए जाने के तुरंत बाद वर्मा ने 8 जनवरी को महकमे में ताबड़तोड़ तबादलों के आदेश दिए थे। वर्मा ने अपनी अनुपस्थिति में किए गए तबादलों को भी रद्द कर दिया था। उन्होंने गुरुवार को 2006 बैच के आईपीएस ऑफिसर मोहित गुप्ता को स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ मामले में इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर नियुक्त किया था। इससे पहले, बुधवार सुबह कार्यभार संभालते ही 11 अधिकारियों के तबादले के आदेश दिए थे और गुरुवार को उन्होंने 5 नए बदलाव भी किए थे। अब नागेश्वर राव ने ये सारे फैसले रद्द कर दिए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीकरी की सदस्यता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने गुरुवार को 2-1 के बहुमत के फैसले से वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर पद से हटा दिया और उनका सीबीआई से बाहर तबादला कर दिया।

इससे पहले आलोक वर्मा ने पद से हटाने जाने के एक दिन पद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए  कहा कि झूठे, अप्रमाणिक और बेहद कमजोर आरोपों को आधार बनाकर मेरा ट्रांसफर किया गया। ये आरोप एक ऐसे शख्स ने लगाए हैं, जो मुझसे द्वेष रखता है। अलोक वर्मा ने कहा की सीबीआई उच्च सार्वजनिक स्थानों में भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है, एक ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए. आगे उन्होंने कहा कि इसे बिना किसी बाहरी प्रभावों यानी दखलअंदाजी के कार्य करना चाहिए. मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की है, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसे केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी अधिकार क्षेत्र के दिए गए थे और जिन्हें रद्द कर दिया गया।'