सोने के सिक्कों के लिए पिछले चार महीने के जमीन खोद रहे हैं ग्रामीण

नई दिल्ली (9 दिसंबर):  जयपुर के पास मालपुरा के जानकीपुरा की दबेड़िया नाड़ी में सोने के सिक्के ढूंढने के लिए चार महीनों से लोग खुदाई कर रहे हैं। सिक्के मिलने पर लोग चुपचाप घर ले गए। पुलिस इस बात को अफवाह बताती रही। गुरुवार को जब पुरातत्व विभाग के अफसरों ने पुलिस को मिले दो सिक्कों की जांच की तो पता चला कि ये सिक्के गुप्तकाल के हैं और इनकी कीमत का अनुमान लगाना मुश्किल है।

- पुरातत्व विभाग ने सोने के सिक्कों की जांच के बाद नाड़ी में प्राचीन खजाना होने की संभावना जताई। इस क्षेत्र के संरक्षित करने की बात कही।

- गामीणों का कहना है कि नाड़ी में पत्थर की खान की खुदाई में निकाली गई चार फुट मिट्‌टी को पाल के रूप में डाला गया था।

- जुलाई में बरसात से पाल से मिट्‌टी हटने पर स्वर्ण मुद्राएं बाहर चमकने लगी। पहले इसे गुप्त रखा लेकिन ज्यों बरसात हुई अन्य लोगों सोना मिलने लगा।

- सितंबर में सिक्के मिलने का मामला फैला ओर नवंबर-दिसंबर में दूर-दूर के लोग यहां सोना तलाशने एकत्र होने लगे

सिक्के बेचने वाले दलाल नामजद

- दो सिक्के बरामद होने के बाद डिग्गी पुलिस द्वारा एक जांच दल थानाधिकारी प्रेमसिंह नाथवत के नेतृत्व में गठित किया गया है।

- जांच दल ने कलमंडा व जानकीपुरा सहित आसपास के इलाके के करीब एक दर्जन लोगों को चिह्नित किया है, जिन्होंने सोने के सिक्के बेचने में दलाल का रोल निभाया था।

- पुरातन मंडल के अधिकारियों ने एक किलोमीटर की परीधि में भ्रमण कर प्राचीन काल में उपयोग की जाने वाली ईंटों के टुकडे व हडि्डयों के अवशेष सहित अन्य वस्तुएं संकलित की।

- जांच के बाद अधिकारी बोले कि यहां खजाना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

- चर्चा है कि कभी भूकंप आने से यहां बसा कोई गांव धरती में समा गया। अब खुदाई में प्राचीन अवशेष मिल रहें है।

- प्राचीन काल में बंजारा कमाए धन को लूटपाट के डर से छिपा कर निशान कर जाते थे। भूलवश जो बंजारे सोना नहीं ले सके वो अब खान खोदने पर मिलने लगा है।

- सिक्के मिलने का सिलसिला यहां लंबे समय से चल रहा है । गांववासियों की माने तो करीब दस साल पहले यहां खनन के दौरान स्वर्ण मुद्राएं मिली।