इस ट्रेन के आगे फ्लाइट की स्पीड भी फीकी, मोदी सरकार को मिला प्रस्ताव

नई दिल्ली (8 दिसंबर): शायद आप खबर की हैडिंग पढ़कर सोच रहे होंगे कि यह सिर्फ एक अफवाह मात्र है, लेकिन ऐसा नहीं है। क्योंकि केंद्र सरकार ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें ट्रेन को फ्लाइट से भी तेज चलाया जा सके।

अगर मोदी सरकार इस योजना को स्वीकृति देती है तो लोगों के लिए किसी बड़े सपने के पूरा होने जैसा होगा। बेंगलोर मिरर में छपी खबर के मुताबिक सुपरसोनिक लैंड ट्रवेल सिस्टम को तैयार करने में करीब 6744 करोड़ का खर्च आएगा, जबकि एक बुलेट ट्रेन बनाने में 80939 करोड़ का खर्च की उम्मीद है। भारत में बुलेट ट्रेन निर्माण की तैयारी जारी है इसके 2023 में तैयार होने की उम्मीद है।

इस योजना की क्या हैं खूबियां

- सुपरसोनिक लैंड ट्रवेल सिस्टम में हाईप्रेशर कैप्सूल का प्रयोग होगा, जिसमें आंशिक रुप से वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल होगा। इसकी स्पीड 1216 किमी/घंटा होगी। इस सिस्ट के जरिए लोगों से वादा किया जाता है कि उन्हें एक जगह से दूसरे जगह जाने में फ्लाइट से भी आधा समय लगेगा। इसका चार्ज भी फ्लाइट के टिकट से आधा होगा।

- इसके ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम में हाईपरलूप ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (एचटीएस) का इस्तेमाल होगा। इसकी स्पीड 1216 किमी/घंटा बताई जा रही है। यानी इसके जरिए महज 30 मिनट में 345 किमी की यात्रा की जा सकती है। सीधा मतलब है कि महज आधे घंटे में बेंगलुरु से चेन्नई पहुंचा जा सकता है।

- एचटीएस पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित होता है। ट्यूब के टॉप पर सोलर पैनल लगे होते हैं और विंड टरबाइन के जरिए बाकी ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।