डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के प्रति सख्त विदेश नीति के दिए संकेत

नई दिल्ली ( 7 दिसंबर ): नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के प्रति सख्त विदेश नीति के संकेत दिए हैं। ट्रंप के रुख को लेकर चीन ने चेतावनी दी है। साथ ही ओबामा प्रशासन की ओर से भी चेताया गया है। सोमवार को व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नस्ट ने कहा कि ताइवान के प्रति ताजा नजरिये से अमेरिका-चीन संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन से सीधे बातचीत की थी। उनका यह कदम 1979 में स्थापित अमेरिकी पॉलिसी के उलट था। तब के राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने चीन से एक समझौता किया था कि अमेरिका ताइवान से औपचारिक रिश्ते नहीं रखेगा, क्योंकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। ट्रंप के इस कदम से चीन को एक झटका लगा है। इसके अलावा ट्रंप ने ट्विटर के जरिए चीन की व्यापार और सैन्य नीति पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने मुद्रा अवमूल्यन और दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन की आलोचना की है।

इस पर अर्नेस्ट ने कहा, 'यह साफ नहीं है कि यह कैसा कूटनीतिक प्रयास है, यह समझाना मैं उन पर छोड़ता हूं।' वैसे अभी तक ट्रंप के सलाहकार भी इस कदम के पीछे की मंशा को ठीक से समझा पाने में नाकामयाब रहे हैं। वे यह साफ नहीं कर पाए हैं कि ताइवान की नेता से बात करना क्या किसी नई नीति की ओर उठाया गया कदम है या फिर सिर्फ एक शिष्टाचार बातचीत। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ बनने वाले रेंस प्रीबस ने कहा कि ट्रंप को अच्छे से पता था कि वह क्या कर रहे हैं, वहीं उप राष्ट्रपति चुने गए माइक पेंस के मुताबिक यह सिर्फ बधाई देने के लिए की गई एक शिष्टाचार बातचीत थी।