हाईकोर्ट ने किया गुर्जर समेत पांच जातियों का आरक्षण रद्द, संघर्ष समिति ने किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान

जयपुर ( 9 दिसंबर ): गुर्जर आरक्षण पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 50 फीसदी से अधिक आरक्षण राज्य में नहीं दिया जा सकता है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने गुर्जरों को विशेष आरक्षण देने वाले विशेष पिछड़ा वर्ग बिल को असंवैधानिक कहते हुए रद्द कर दिया है। यह बिल राजस्थान सरकार ने गुर्जरों सहित पांच अन्य जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 5 पर्सेंट आरक्षण देने के लिए साल 2015 में विधानसभा में पेश किया था।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस मनीष भंडारी की बेंच ने सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। इस कानून को कैप्टन गुरविंदर सिंह और समता आंदोलन समिति ने चुनौती दी थी। इस याचिका में कहा गया था कि संविधान के मुताबिक आरक्षण की सीमा 50 पर्सेंट है लेकिन इस नए कानून से आरक्षण इस सीमा को पार कर जाता है

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने आरक्षण पर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य और केंद्र सरकार पर ठीक पैरवी नहीं करने का आरोप लगाया है। समिति ने कहा कि गुर्जर अब आरक्षण के मसले पर सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

फिलहाल राज्य में 49 फीसदी आरक्षण लागू है। राजस्थान सरकार ने 2015 में गुर्जरों समेत पांच जातियों को आरक्षण के लिए विधानसभा में विधेयक पारित कराया था। लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने गुर्जर आरक्षण की मांग मानी थी। इस दौरान राज्य में खासा बवाल मचा था, जगह जगह रेल और बसें रोकी गई थीं जिससे राज्य में हाहाकार मच गया था।