"संसद में बोलने नहीं देते, इसलिए आप लोगों के बीच बोलता हूं"

नई दिल्ली (10 दिसंबर): गुजरात के बनारस कांठा में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर संसद नहीं चलने देने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि संसद में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, इसलिए आपके बीच आया हूं।

हालांकि विपक्ष यह मांग करता रहा है कि संसद में नोटबंदी पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। जबकि सरकार का कहना है कि पीएम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन वह हर समय सदन में मौजूद नहीं रह सकते। ऐसे में संसद में कोई काम नहीं हो रहा है।

पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा...

- विपक्ष का झूठ टिक नहीं पाता इसलिए वे संसद में हंगामा करते हैं। इसलिए मैंने लोकसभा में नहीं जनसभा में बोलने का फैसला किया।

- लोग एक तरफ तो नीतियों का विरोध करते हैं और दूसरी तरफ मतदाता सूची पर ध्यान देते हैं।

- यह निर्णय (नोटबंदी) आसान नहीं है। मैंने कहा था कि 50 दिन तकलीफ होगी ही होगी। लेकिन 50 दिन के बाद स्थिति सामान्य होती जाएगी।

- कालेधन वाला कोई नहीं बचेगा। हमने पिछले दरवाजे पर भी गेटकीपर लगाए हैं। 8 तारीख के बाद पाप करने वाले लोग बचने वाले नहीं हैं।

- वक्त बदल गया है अब आपके मोबाइल फोन में ही बैंक आ गया है।

- अब आपको बैंक की कतार में जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि बैंक आपके मोबाइल की कतार में खड़ा हो जाएगा।

- चार्वाक ऋषि कहे थे, मृत्यु के बाद कुछ नहीं होगा, सारे सुख ले लो। लेकिन इस दर्शन को हमारे देश ने स्वीकार नहीं किया। ऋणं लेत्वा, घृतं पिबेत की बात करने वालों को सोचना होगा।

- साल तक ईमानदार लोगों को परेशान किया गया। मैंने ईमानदारों के हित में काम किया। मैं लोगों को धन्यवाद देता हूं।

- जाली नोटों के कारोबारी जितने देश में नहीं उससे ज्यादा बाहर हैं। इससे नक्सलवाद से जुड़े लोग मुख्यधारा में आने लगे हैं।

- देश का अर्थतंत्र नोटों के ढेर के नीचे दबने लगा था। मेरी लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है।

- मैंने गरीब की ताकत बढ़ाने के लिए नोटबंदी की है।

आज चर्चा चल रही है कि नोटों का क्या होगा। 8 तारीख से पहले 100, 50, 20 के नोटों की कोई कीमत थी क्या? 8 तारीख के बाद छोटे नोटों में जान आ गई।

- हमें विकास और बदलाव के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम करना चाहिए।

- लोग संसद को चलने नहीं दे रहे हैं। इससे हमारे राष्ट्रपति भी दुखी हो गए और उन्हें सार्वजनिक रूप से सांसदों को टोकना पड़ा।