भारत की उड़ी नींद, तिब्बत के रास्ते नेपाल तक पहुंचा चीन

नई दिल्ली ( 10 दिसंबर ): चीन ने तिब्बत के रास्ते नेपाल को जोड़ने वाले नए रेल रोड कार्गो सेवाओं को लॉन्च किया है। इस कार्गो की वजह से दर्जनों ट्रक सामान बेहद कम वक्त में नेपाल तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। शनिवार को जारी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक़ कार्गो के जरिए गिरांग सीमा से काठमांडू के लिए 28 लाख डालर का पहला कंसाइनमेंट रवाना कर दिया गया है।

चीन ने इसलिए लॉन्च किया कार्गो सर्विस ?

चीन का मकसद दक्षिण एशिया के देशों में बिजनेस का विस्तार करना है। शुक्रवार को लॉन्च हुए नए रेल और रोड कार्गो की वजह से वह गुंडॉन्ग लिंक के रास्ते तिब्बत और नेपाल तक अपने सामान पहुंचा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक़ जूतों, कपड़ों, टोपियों, फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक आदि सामान नेपाल भेजा जा रहा है।

इस तरह काठमांडू तक पहुंचेगा चीन का सामान

चीन के गुआंगडॉन्ग प्रोविनेंस से तिब्बत तक 5200 किमी की दूरी रेल से जबकि आगे काठमंडू तक बाकी 870 किमी की दूरी ट्रकों के जरिए पूरी की जाएगी। चीन की योजना भारत तक रेल और रोड कार्गो का विस्तार करना है।

बता दें कि इसी साल मधेशी विवाद की वजह से भारत से कार्गो सप्लाई बाधित होने के बाद नेपाल की प्रचंड सरकार ने चीन के साथ व्यापारिक करार किया था। इसका मकसद चीन से करीबी बढ़ाने के साथ ही सामानों की सप्लाई के लिए भारत पर निर्भरता ख़त्म करना था।

नेपाल में चीन की व्यावसायिक उपस्थिति से भारत पर असर पड़ेगा। वहां भारतीय सामानों की मांग में कमी आ सकती है। उधर, चीन की योजना नेपाल तक रेल लिंक बनाना है। बता दें कि इन तमाम मसलों पर जी जिनपिंग और प्रचंड कुमार दहल के बीच हाल ही में बात भी हुई थी। पिछले दिनों दोनों नेता ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने गोवा आए थे। चीन साउथ एशिया देशों में व्यापार बढ़ाने के लिए कार्गो सेवा को विस्तार देना चाहता है। उसका मकसद भारत और अन्य एशियाई देशों तक सीधे रेल और सड़क रास्ते से जुड़ना है।