पीएम मोदी की नई य़ोजना के तहत झूठी घोषणा पर देना पड़ सकता है 85% टैक्स

नई दिल्ली(10 दिसंबर): नोटबंदी के बाद अगर आपने अपने बैंक अकाउंट में ज्यादा कैश जमा किए हैं तो आयकर विभार के अधिकारियों को जवाब देने के लिए तैयार हो जाइए। आपके पास पूरे कागजात होने चाहिए। ये सभी कागजात सही होने चाहिए, अगर आपके दावे गलत साबित हुए तो 85 प्रतिशत तक जुर्माना लग सकता है।

- जांच की सख्ती और 85 प्रतिशत के पेनल्टी टैक्स को देखते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में हाल में घोषित प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 2016 (PMGKY) में आना ही समझदारी है। इस योजना के तहत किए गए डेक्लेरेशन में 50 फीसदी टैक्स वसूला जाएगा और बाकी बचा 50 प्रतिशत पैसा चार साल के लिए इंट्रेस्ट-फ्री फिक्स्ड डिपॉजिट में लॉक हो जाएगा।

- चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की नजर में 85 फीसदी टैक्स देने से बेहतर विकल्प PMGKY है। उन्होंने कहा कि जिन भी लोगों ने भारी कैश अपने अकाउंट में जमा कराया है, सरकार उनसे जनवरी 2017 तक अपनी आय घोषित करने और टैक्स भरने को कह सकती है। अगर कोई यह दावा करता है कि व्यापार में अचानक हुए भारी मुनाफे की वजह से पैसा ज्यादा हो गया तो उसे सेल्स टैक्स या सर्विस टैक्स की रसीदें और अन्य कागजात दिखाने पड़ सकते हैं।

- वहीं अगर कोई भारी कैश जमा करने की वजह खेती से हुई आय बताता है तो उसकी जांच और सख्ती से की जाएगी क्योंकि इस आय कैटिगरी में कोई टैक्स नहीं लगता और काला धन छुपाने के लिए इसे आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हाल ही में संशोधित किए गए इनकम टैक्स ऐक्ट में यह प्रावधान है कि छूट का क्लेम करने वाले सभी 'किसानों' को मंडी की रसीदें दिखानी होंगी।

- खेती से हुई आय डिक्लेयर करने के लिए अब ग्राम सेवक और उस इलाके के सर्कल ऑफिसर से सर्टिफिकेट बनवाकर जमा करवाना होगा। इस सर्टिफिकेट में बुआई, बीज और 

फर्टिलाइजर की खरीद पर हुए खर्च और बिक्री की रसीद की जानकारी शामिल होगी। वहीं वे व्यापारी जो सेल्स बढ़ने का दावा करते हुए अपने पैसे को वैध बताने की कोशिश करेंगे, उन्हें उसी अनुपात में सेल्स टैक्स और सर्विस टैक्स की रसीदें सबूत के तौर पर पेश करनी होंगी। अगर उनका दावा सही पाया जाता है तो उन्हें नियमित 35 प्रतिशत का टैक्स भरना होगा।

- नोटबंदी के ऐलान के बाद शुरुआती दिनों में पुराने नोटों के जरिए बड़ी मात्रा में काले धन को गोल्ड में बदला गया है। यही वजह है कि इनकम टैक्स विभाग की जूलरों के रिटर्न पर भी कड़ी नजर है।