Thursday, July 9, 2020

300 साल बाद हिंदु धर्म में लौटे सैकड़ों लोग, सनातन रीति-नीति से कर रहे संस्कार

यहां के 40 मुस्लिम परिवारों के करीब 250 लोगों ने हिंदू धर्म में वापसी की है। इन्हीं में से एक परिवार ने हिंदू धर्म अपनाकर बाकायदा अपने परिवार की 80 वर्षीय मृतक महिला का हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार भी किया।

नई दिल्ली। औरंगजेब के शासनकाल में अपनी जान-माल और अस्मत बचाने के लिए जो लोग हिंदू धर्म छोड़कर मजबूरी में मुसलमान बन गये थे उनमें से लगभग 250 लोगों ने 300 साल बाद वापस हिंदु धर्म में वापसी की है। हिंदु धर्म में वापसी करने वाले ये 40 परिवार चुपचाप अपने काम में मस्त रहते थे। इन लोगों के बारे में किसी को मालूम भी न था। हाल ही में घर की एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद जब उन्होंने सनातन रीतियों से अंतिम संस्कार किया तो आस-पड़ोस के लोगों की संवेदनाएं उमड़ पड़ीं।

यह घटना हरियाणा के हिसार जिले के बीढमीरा गांव की हैं। यहां के 40 मुस्लिम परिवारों के करीब 250 लोगों ने हिंदू धर्म में वापसी की है। इन्हीं में से एक परिवार ने हिंदू धर्म अपनाकर बाकायदा अपने परिवार की 80 वर्षीय मृतक महिला का हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार भी किया।

इससे पहले 18 अप्रैल को जींद के दनोड़ा गांव में भी 6 मुस्लिम परिवारों के 35 लोगों ने हिंदू धर्म अपनाया था। गांववालों के मुताबिक, बीढ़मीरा गांव के रहने वाले जो 40 परिवार मुस्लिम से हिंदू धर्म में परावर्तित हुए हैं, वे आजादी से पहले जींद के इसी दनोड़ा गांव के निवासी थे।

हिंदू धर्म अपना चुके सतबीर ने कहा कि उनकी मां फूली देवी का शुक्रवार को देहांत हुआ था। देहांत पर गांव के मुस्लिम परिवारों ने तय किया कि जब वे खुद को हिंदू मानते ही हैं और सारे रीति-रिवाज भी उसी हिसाब से करते हैं तो बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार भी हिंदू रीति से होगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले किसी की मृत्यु होने पर उसका मुस्लिम रीति से अंतिम संस्कार होता था।

सतबीर ने दावा किया कि वे डूम जाति के हैं और उन्होंने सुना है कि उनके पूर्वजों ने मुगल बादशाह औरंगजेब के दबाव में मुस्लिम धर्म अपनाया था। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा गांव सारे हिंदू तीज-त्योहार मनाता है, बस अंतिम संस्कार मुस्लिम तरीके से होता था। धर्म परिवर्तन के पीछे किसी दबाव से उन्होंने साफ इनकार किया।

उधर मुस्लिम वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष हर्फुल खान भट्टी ने कहा कि उन्हें दनोड़ा कलां गांव की घटना की जानकारी है, लेकिन बीढ़मीरा गांव के बारे में नहीं पता चल सका है। उन्होंने कहा, ‘अपनी मर्जी से कोई किसी भी धर्म को मान सकता है लेकिन इसके पीछे अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण का लाभ लेने की मंशा नहीं होनी चाहिए।

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