एक साथ आए जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा और तालिबान, इंडियन आर्मी ने बनाया तीनों के खात्मे का ये मजबूत प्लान, देखें रिपोर्ट

नई दिल्ली। अलकायदा से अलग होकर भारत में आतकंवाद फैलाने के लिए मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद नाम का गिरोह बनाया था, अब उसी जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर अलकायदा और तालिबान से हाथ मिला लिया है। कहा तो यह भी जाता है कि जैश-ए-मोहम्मद पहले से ही अफगानिस्तान में अलकायदा के साथ मिलकर पाकिस्तान के इशारे पर वहां की सरकार को अस्थिर करने के लिए हिंसा को अंजाम देता रहा है, लेकिन इस बार उसने अलकायदा और तालिबान से अपने रिश्तों को जगजाहिर कर दिया है। जैश-ए-मोहम्मद के इस ऐलान से भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने भी तीनों के खात्मे का मजबूत प्लान तैयार कर लिया है। इंडियन आर्मीका कहना है कि पाकिस्तानी फौज में  सीधी जंग की हिम्मत और ताकत नहीं है इसलिए वो आतंकियों का सहारा ले रही है, लेकिन पाकिस्तान और आईएसआई की सभी साजिशें नाकाम कर दी जायेंगी।

जैश-ए-मोहम्मद के इस ऐलान को हाल ही में अलकायदा के मौजूदा सरगना अल जवाहिरी के उस वीडियो मैसेज से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उसने हिंदुस्तान में जिहाद छेड़ने और मुस्लिम युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया है। ऐसा माना जा रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद के साथ अलकायदा घाटी में घुसपैठ कर सकता है। बहरहाल, जानकारी यह मिली है कि भाड़े के कुछ आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से पैसे लेकर तालिबान और अलकायदा के लिए काम कर रहे हैं।
ऐसा भी माना जा रहा है कि हिजबुल मुजाहिद्दीन की कमर टूटने के बाद आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद को मजबूत करने के लिए अलकायदा और तालिबान को उसके साथ मिलाया है। मजबूत कर सकता है। बता दें कि इन तीनों आतंकी गिरोहों को पैसा, हथियार और ट्रेनिंग का इंतजाम पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई ही करती है।

अफगानिस्तान में तालिबान और अमेरिका में शांति समझौता होजाने के बाद तालिबान अफगान फोर्सेस पर सीधे हमले करने के बजाए अब जैश-ए-मोहम्मद के कंधे पर रख बंदूक चला रहा है। पाकिस्तान की इस चाल को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भी भांप लिया है। इसलिए अमेरिका ने पाकिस्तान को उसआर्थिक मदद पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी कोरोना से लड़ने के नाम पर दी जाने वाली थी।

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