Monday, May 25, 2020

Corona Virus: अचानक गायब हो जायेगा कोरोना वायरस, नव संवतसर के पहले दिन आई बड़ी खबर

नभ मण्डल के स्वामी सूर्य को प्रमादी संवतसर में सबसे अधिक दायित्व और अधिकार मिले हैं। इसलिए ब्रह्माण्डीय शक्तिपुंज के केंद्र भारत का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति को अधिक अधिकार और दायित्व मिलेंगे। भारत का केंद्रीय नेतृत्व करने वाला व्यक्ति अपने शत्रुओं को धराशायी करेगा। अस्त्र-शस्त्र और दल-बल से विश्व में कीर्तिमान स्थापित करेगा। नव संवतसर के पहले दिन यह खबर भी आ रही है कि कोरोना वायरस तीन महीने बाद अचानक गायब हो जायेगा।

नई दिल्ली। ‘समस्त वसुधावासियों को  नव संवतसर की शुभकामनाएं!’ ईसवीं सन 2020 के तीसरे यानी मार्च महीने की 25 तारीख को शुरू हो रहे सनातन संवत का नाम ‘प्रमादी संवत’ है। प्रमादी संवत का राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। इसके बावजूद नभमण्डल के राजा सूर्य हैं और उनके दायित्व सबसे अधिक हैं। इस वर्ष जल (वर्षा), फल-फूल-फसल का स्वामित्व सूर्य के पास है। सूर्य सेनापति भी हैं। इस वर्ष बारिश अच्छी होगी, फल-फूल से पेड़, लताएं और पौधे खिले-फले रहेंगे। फसल अच्छी होगी। सेनापति का अधिकार सूर्य के पास होने का प्रभाव और परिणाम परिलक्षित होने लगा है। देश का शीर्ष नेतृत्व कठोर-मगर आवश्यक और सफल निर्णय लेगा। भारतीय नेतृत्व (प्रधानमंत्री मोदी) की 21 दिनों के लिए देश में सर्वांग निषेधाज्ञा (कंप्लीट लॉकडाउन) की उद्घोषण इसका सटीक उदाहरण हैं। देशवासियों को अपने दैनंदिन हित और सुरक्षित भविष्य के लिए इस वर्ष ऐसे ही कुछ अन्य कठोर निर्णयों का सामना करना पड़ सकता है।

इस समय देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  कर रहे हैं जो वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि के जातक हैं। संवतसर का  सेनापति सूर्य ऐसे जातकों को जनहित-देशहित और विश्वहित में कठोर निर्णय लेने की क्षमता और शक्ति प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय दैहिक, दैविक और भौतिक शत्रुओं की कमर तोड़ देंगे। देश के नेतृत्व की रणनीति-कूटनीति और समरनीति के आगे प्रत्यक्ष और परोक्ष शत्रु पस्त और परास्त ही नहीं बल्कि प्राण और अस्तित्व बचाने के लिए नाक रगड़कर क्षमा मांगते दिखाई देंगे। देश के खगोल विज्ञानी प्रकाश की गति से तेज और वज्र की तरह प्रहार करने वाला कोई ब्रह्मास्त्र या सुदर्शन चक्र सरीखा अंतरिक्ष अस्त्र देश की सेना को सौंप सकते हैं। कोरोना जैसी आपदाएं प्रमादी संवतसर के तीसरे महीने के बाद अचानक गायब हो जायेंगी। हालांकि ऐसी आपदाएं संवतसर के पहले एक पक्ष के बाद ही हीन होने लगेंगी।
इस वर्ष दूध और शहद की नदियों वाला मुहावरा भारत में चरितार्थ होने के योग बन रहे हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने और शासन-प्रशासन में सहयोग तथा समन्वय के संकेत मिल रहे हैं। जहां अन्नदाता को पर्याप्त धन-मान-सम्मान मिलेगा तो वहीं देश का शिक्षक-प्रशिक्षक और छात्र वर्ग अल्प प्रयासों से ही अध्ययन-अध्यापन तथा खोज-शोध कार्यों में विशेष उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। इस वर्ष ‘काल’ (समय) का वास वैश्य के आवास में है। इसलिए उद्योग-व्यापार जगत में सुख-संतुष्टि और संपन्नता रहेगी। कोष का अधिकार संवतसर के राजा बुध ने खुद अपने पास रखा है इसलिए सरकारों खास तौर पर भारत सरकार के राजस्व में बढोतरी, घाटे में कमी होगी। विदेशी मुद्राकोष में वृद्धि और देश का सम्मान दुनिया के शीर्ष धन्न संपन्न देशों में होगा।

प्रमादी संवतसर के नीरसेश और सस्येश स्वंय देवगुरु बृहस्पति हैं। इसलिए पीली धातुओं जैसे सोना, पीतल के अलावा पीले पादर्थ तथा हीरे-जवाहारात की मांग और मूल्य में वृद्धि देखी जा सकती है। प्रजा की आस्था-विश्वास धर्म-अध्यात्म और योग में बढ़ेगी। देश में पूजा-जप-तप, अध्यात्मिक और योगिक अनुष्ठान अपेक्षाकृत अधिक आयोजित किये जायेंगे। प्रमादी संवत का वर्षफल यह भी बताता है कि इस वर्ष जीवनदायी पदार्थों का संचय नहीं होगा। पशुओं में रोग बढ़ सकते हैं। पशु पालक अपने पशुओं की रक्षा के लिए पशुपति भगवान शंकर की पूजा अवश्य करें।

पढ़िए- प्रमादी संवतसर और नवरात्रि की विशेषताएंः

सनातन पंचांग अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवतसर का पहला दिन है। इसी दिन ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती के कहने पर सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से कालगणना प्रारंभ हुई। इसी दिन सूर्य की पहली किरण पृथ्वी पर फैली थी। 9 ग्रह, 27 नक्षत्र और 12 राशियों का उदय और भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार भी इसी दिन हुआ था। इस वर्ष का चैत्र नवरात्र अतिविशिष्ट है। बार का नवरात्र पूर्ण है। मतलब यह कि इस बार मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों की पूजा का अवसर मिलेगा। इस बार किसी भी तिथि का क्षय या बृद्धि नहीं है। सबसे शुभ और महत्वपूर्ण यह कि इस बार चार सर्वार्थसिद्धि योग, छह रवि योग, एक अमृतसिद्धि योग, एक द्विपुष्कर योग और एक गुरु पुष्य योग बन रहा है जो स्वंय में अति दुर्लभ और शुभ है।

* 26 मार्च को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग
* 27 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग ( सुबह 06:17 से सुबह10:09) और रवि योग
* 28 मार्च रवि योग
* 29 मार्च को रवि योग
* 30 मार्च पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और सुबह 06:13 से सुबह 05:18 तक रवि योग
* 31 मार्च को द्विपुष्कर योग (सुबह 06:12 से शाम 06:44) और रवि योग (सुबह 07:14 से 06:44 शाम)
* 2 अप्रैल पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग (शाम 07:29 से सुबह 06:09) योग रहेगा।

(समस्त विचार एवं दायित्व लेखक पं. हरिओम पाण्डेय)

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