Tuesday, June 2, 2020

Good News: भारत में इस जगह बन रही कोरोना वैक्सीन, चालबाज चीन के अरमानों पर फिरा पानी – देखें रिपोर्ट

ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना वैक्सीन पर ट्रायल में सकारात्मक नतीजे मिल रहे है। बच्चों और बुजुर्गों पर ट्रायल शुरू हो गया है। भारत की एसआईआई इस वैक्सीन का उत्पादन करेगी। ऐसा कहा जा रहा है कि दुनिया में सबसे पहले कोरोना वैक्सीन का उत्पादन भारत के एसआईआई में ही होगा।

नई दिल्ली। कोरोना से संघर्ष कर रहे देशों के लिए अच्छी खबर है। खबर यह है कि कोरोना की वैक्सीन का एक के बाद एक ट्रायल सफल हो रहा है। अब बच्चों और बुजुर्गों पर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। इस ट्रायल के नतीजे आने के बाद जल्दी ही वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो जायेगा। इससे भी अच्छी खबर यह है कि इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में होगा। इसी के साथ कोरोना वैक्सीन बनाकर दुनिया को ब्लैकमेल करने की चीन की मंशा नाकाम हो गयी है।

पिछले महीने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने वैक्सीन का प्रभाव और सुरक्षा की जांच करने के लिए एक हजार से अधिक वॉलनटिअर्स पर इसका ट्रायल किया था। वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को घोषणा की कि अब उनकी प्लानिंग पूरे ब्रिटेन में बच्चों और बुजुर्गों समेत 10,260 लोगों पर इस वैक्सीन के ट्रायल की है।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन के उत्पादन की जिम्मेदारी दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को दी गयी है। सेरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के चीफ एग्जिक्यूटिव अदार पूनावाला ने ऑन लाइन मीडिया को बताया है कि कोविड-19 की वैक्सीन को तैयार होने में सामान्य स्थिति में 2 साल का वक्त लगने की संभावना है लेकिन आपात परिस्थितियों में बच्चों और बुजुर्गों पर किये जा रहे ट्रायल के नतीजे सफल रहे तो इस साल के अंत से पहले ही वैक्सीन मार्केट में आ सकती है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीन विकसित करने की काम में लगी टीम को लीड कर रहे एंड्रयू पोलार्ड ने कहा, ‘क्लिनिकल स्टडी बहुत बेहतर तरीके से आगे बढ़ रही है। हम इस बात की जांच करने जा रहे हैं कि बुजुर्गों में यह वैक्सीन कितनी असरदार होती है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह टीका पूरी आबादी को सुरक्षा मुहैया करा सकता है।’
इसके अलावा एसआईआई का पुणे कैंपस इस वक्त यूके की ऑक्सफोर्ड, अमेरिका के कोडेजेनिक्स और ऑस्ट्रेलिया की बायोटेक फर्म थेमिस की विकसित की गई वैक्सीन कैंडिडेट्स पर काम कर रही है। पूनावाला ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन से सबसे ज्यादा उम्मीदें दिखाई है क्योंकि यह ट्रायल में सबसे आगे बताई जा रही है।

कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने के दूसरे प्रमुख दावेदारों में अमेरिका स्थित नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मोडेर्ना इंक और इनवियो फार्मास्युटिकल है। दोनों टीकों में प्रयास किया जा रहा है कि कोरोना वायरस की जेनेटिक्स को शरीर में ट्रांसप्लांट किया जाए ताकि वह एंडीबॉडी विकसित करें जो प्रतिरोधिक क्षमता के लिए जरूरी है। सौभाग्य से सफल होने पर कुछ महीनों में ही बड़े पैमाने पर लोगों को टीके देने की शुरुआत हो सकती है।

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