Friday, May 29, 2020

Chaitra Navratri 2020: आज ऐसे करें मां ब्रह्मचारणी की आराधना, पूरी होगी हर मनोकामना

Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि 2020 (Chaitra Navratri) का आज दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे मां ब्रह्मचारणी की पूजा की मान्यता है। मान्‍यता है कि अगर को भी इन नौ दिनों में सच्‍चे मन से मां दुगा की आराधना करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि 2020 (Chaitra Navratri) का आज दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे मां ब्रह्मचारणी की पूजा की मान्यता है। दरअसल नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र  25 अप्रैल से शुरू होकर 2 अप्रैल को रामनवमी (Ram Navmi) के साथ इनका समापन होगा।

आपको बता दें कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शैल पुत्री (Shailputri) की पूजा की जाती है। इसी के साथ नवरात्रि के पहले दिन से ही माता के भक्त घरों में कलश स्थापित करते हैं। कुछ भक्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं तो कुछ पहला और आखिरी व्रत रखते हैं।

मान्‍यता है कि अगर को भी इन नौ दिनों में सच्‍चे मन से मां दुगा की आराधना करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini)

मां दुर्गा का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय की प्राप्ति होती है। इन्होंने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए इन्हें तपश्चारिणी के नाम से भी जाना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र

‘‘या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।’’

मां ब्रह्मचारिणी दुर्गा का ही एक स्वरुप हैं। जो अपने भक्तों को सदैव ही अच्छे फल प्रदान करती हैं। मन एकाग्र कर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण होता है। यानि तप का आचरण करने वाली देवी। इसीलिए मां ब्रह्मचारिणी के दाहिन हाथ में जप की माला एवं बांए हाथ में कमण्डल है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के आत्मबल में वृद्धि होती है जिससे वह जीवन में आने वाले संकटों से घबराता नहीं हैं।

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

श्लोक

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।

पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित  फूल चढ़ाएं।

इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाएं और इन मंत्रों से प्रार्थना करें।

  1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  1. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें।

मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।

मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ी कथा

एक कथा के अनुसार पूर्वजन्म में मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। इसीलिए इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। मां ब्रह्मचारिणी ने एक हजार वर्ष तक फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। इसके बाद मां ने  कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप को सहन करती रहीं। टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं।

इससे भी जब भोले नाथ प्रसन्न नहीं हुए तो उन्होने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। मां ब्रह्मचारणी कठिन तपस्या के कारण बहुत कमजोर हो हो गई। इस तपस्या को देख सभी देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने सरहाना की और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।

चैत्र नवरात्रि की तिथियां 
25 मार्च 2020: 
नवरात्रि का पहला दिन, प्रतिपदा, कलश स्‍थापना, चंद्र दर्शन और शैलपुत्री पूजन.
26 मार्च 2020: नवरात्रि का दूसरा दिन, द्व‍ितीया, बह्मचारिणी पूजन.
27 मार्च 2020:  नवरात्रि का तीसरा दिन, तृतीया, चंद्रघंटा पूजन.
28 मार्च 2020: नवरात्रि का चौथा दिन, चतुर्थी, कुष्‍मांडा पूजन.
29 मार्च 2020: नवरात्रि का पांचवां दिन, पंचमी, स्‍कंदमाता पूजन.
30 मार्च 2020: नवरात्रि का छठा दिन, षष्‍ठी, सरस्‍वती पूजन.
31 मार्च 2020: नवरात्रि का सातवां दिन, सप्‍तमी, कात्‍यायनी पूजन.
1 अप्रैल 2020: नवरात्रि का आठवां दिन, अष्‍टमी, कालरात्रि पूजन, कन्‍या पूजन.
2 अप्रैल 2020: नवरात्रि का नौवां दिन, राम नवमी, महागौरी पूजन, कन्‍या पूजन, नवमी हवन, नवरात्रि पारण।

 

 

 

 

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