Tuesday, June 2, 2020

चैत्र नवरात्रि: महा अष्टमी पर कोरोना का असर, ऐसे करें कन्या पूजन

Maha Ashtmi Kanya Pujan: लॉकडाउन और कोरोना खौफ के कारण नवरात्र के दौरान दुर्गाष्टमी और कन्या पूजन को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में यहां हम श्री दुर्गाष्टमी और कन्या पूजन को लेकर अपने पाठकों को समाधान देने की कोशिश कर रहे हैं। 

चैत्र नवरात्रि 2020: चैत्र नवरात्रि पर्व समापन की ओर है। आज महाअष्टमी है। कोरोना का खौफ और लॉकडाउन का असर नवरात्रि पर भी देखने को मिल रहा है। कोरोना वायरस की वजह से लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। ऐसे में लोग अपने घरों में रहकर ही देवी की आराधना और पूजन संपन्न करेंगे।

लॉकडाउन और कोरोना खौफ के कारण नवरात्र के दौरान दुर्गाष्टमी और कन्या पूजन को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में यहां हम श्री दुर्गाष्टमी और कन्या पूजन को लेकर अपने पाठकों को समाधान देने की कोशिश कर रहे हैं।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

अमृत काल- 9 बजे से 10 बजकर 50 मिनट तक

अशुभ राहु काल- दोपहर 12:27 से 2 बजे तक

विजय मुहूर्त- दोपहर 2: 32 से 3:22 तक

देश,  काल तथा पात्र अर्थात  परिस्थितिनुसार जितना भी क्रियात्मक रुप से संभव हो,  आप अपने घर परिवार में ही पूजा पाठ कर सकते हैं। माता का कोई भी चित्र या मूर्ति रख कर पूजा  अर्चना कर सकते हैं।

आप अपने घर की छोटी कन्याओं का पूजन कर सकते हैं। सांकेतिक रुप में उन्हें कुछ धन राशि उपहार स्वरुप दे सकते हैं। वर्तमान में मोबाइल के वीडियो कालिंग, कान्फेंसिंग आदि से भी 9 कन्याओं को जोड़ सकते हैं। उनके उपहार संकल्प करके अपने पास रख लें और हालात ठीक होने पर उन्हेंदेसकतेहैंया फिर भिजवा सकते हैं। या फिर उनके या उनके अभिभावकों के एकाउंट में ऑन लाइन, पेटीएम, पे यू आदि जैसी सुविधाओं से उपहार राशि दे सकते हैं। आजकल घरों में काम करने वाली सहायकों के पास मोबाइल भी हैं और बैंक खाते भी। अन्यथा कर्फ्यू में ढील के समय भी यह दान किया जा सकता है।

कन्या पूजन 

इस दिन यूं तो पारंपरिक तौर पर दुर्गाष्टमी को कन्या पूजन करके व्रतादि का उद्यापन किया  जाता है अष्टमी पर 9 वर्ष या फिर उससे कम उम्र की कन्या 9 कन्याओं तथा एक बालक को अपने निवास पर आमंत्रित करते हैं। लाल पुष्पों की माला पहनाया जाता है। उनका पूजन करके उन्हें हलुवा, पूरी, काले चने का प्रसाद देते हैं। चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं। उन्हें लाल चुनरी या लाल परिधान तथा उचित दक्षिणा एवं उपयोगी उपहार सहित विदा करते हैं। कन्या रक्षा का भी संकल्प लिया जाता है।

ऐसे करें कन्‍या पूजन

  • सुबह स्‍नान कर भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें।
  • अगर नवमी के दिन कन्‍या पूजन कर रहे हैं तो भगवान गणेश की पूजा करने के बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा करें।
  • कन्‍या पूजन के लिए दो साल से लेकर 10 साल तक की नौ कन्‍याओं और एक बालक को आमंत्रित करें।
  • सभी कन्‍याओं के पैर धोएं।
  • रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं।
  • उनके हाथ में मौली बाधें और दीपक दिखाकर उनकी आरती उतारें।
  • कन्‍याओं को खाने के लिए पूरी, चना और हलवा जरूर दें।
  •  भोजन के बाद कन्‍याओं को यथाशक्ति भेंट और उपहार दें।
  • इसके बाद कन्‍याओं के पैर छूकर उन्‍हें विदा करें।

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