Friday, July 3, 2020

दगाबाज चीन को सबक सिखाएगा ‘दोस्ताना’

पीएम मोदी और डोनल्ड ट्रंप की दोस्ती कोरोना काल में और भी मजबूत हो गई है। महामारी की मार झेल रहे अमेरिका को मुसीबत के वक्त भारत ने दवाएं भेजकर मदद की तो अब अमेरिका ने भी भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था वाले एलिट क्लब जी-7 में शामिल करने की पेशकश कर दी है।

नई दिल्‍ली: पीएम मोदी और डोनल्ड ट्रंप की दोस्ती कोरोना काल में और भी मजबूत हो गई है। महामारी की मार झेल रहे अमेरिका को मुसीबत के वक्त भारत ने दवाएं भेजकर मदद की तो अब अमेरिका ने भी भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था वाले एलिट क्लब जी-7 में शामिल करने की पेशकश कर दी है।

ट्रंप ने जून के महीने में होने वाली जी-7 की बैठक को सितंबर तक के लिए टाल दिया है तो लगे हाथ ये भी कह डाला है कि अब ये समूह पुराना पड़ गया है और इसमें भारत की एंट्री जरूरी है। जाहिर है मोदी-ट्रंप का ये याराना चालबाज चीन को बिल्कुल भी हजम नहीं हो रहा, क्योंकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद ट्रंप ने चीन को इस क्लब की सदस्यता के काबिल नहीं समझा है।

एक सबसे बड़े लोकतंत्र का सर्वेसर्वा तो दूसरा दुनिया के सबसे ताकवर मुल्क का मुखिया, जब भी ये दोनों साथ होते हैं तो दुश्मन की आंत में मरोड़ उठने लगती है। लेकिन मोदी-ट्रंप का ये दोस्ताना इन बातों को नजरंदाज करता लगातार बुलंदियों को छू रहा है। अमेरिका जब करोना के कहर से कराह रहा था तब भारत ने फौरन हाइडॉरोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजकर उसका दर्द बांटा था तो अब अमेरिका ने भी भारत को G-7 देशों के एलिट क्लब में एंट्री कराने की ठान ली है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कोरोना के कारण 10 जून से होने वाली G-7 देशों की बैठक टाल दी है तो वहीं लगे हाथ इसमें भारत समेत 4 अन्य देशों को भी शामिल किए जाने की वकालत कर दी है।

अमेरिका राष्ट्रपति डनल्ड ट्रंप ने कहा, ”मैं G7 समिट को स्थगित कर रहा हूं, क्योंकि मुझे ये नहीं लगता कि दुनिया में जो चल रहा है, उसकी ये सही नुमाइंदगी करता है। यह देशों का बहुत ही पुराना समूह हो गया है, इसमें भारत, रूस, दक्षिण कोरिया, और ऑस्ट्रेलिया को भी होना चाहिए।” बेशक अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के साथ जी-7 में रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन ट्रंप की पहली पसंद भारत है। क्योंकि भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार भी है। ऐसे में चीन से दो दो हाथ कर रहे अमेरिका के लिए भारत सबसे बड़ा मददगार साबित हो सकता है।

मोदी-ट्रंप का ‘याराना’
पिछले कुछ महीनों से पूरी दुनिया कोरोना के संकट से दो-चार हैं। चीन से फैले इस वायरस का सबसे बड़ा कहर अमेरिका पर ही टूटा है, जहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं हैं और सबसे ज्यादा संक्रमण भी। अमेरिका समेत कई देशों का इल्जाम है कि चीन ने इस महामारी को जानबूझकर फैलाया है, जिसके कारण अमेरिका और चीन के रिश्ते तल्खी की चरम पर पहुंच गए हैं। लेकिन जब अमेरिका कोरोना वायरस के कहर से कराह रहा था तब भारत ने हाइडॉरोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजकर उसकी मदद की थी और ट्रंप ने भी भारत को मुश्किल वक्त में मदद के लिए शुक्रिया अदा किया था। अभी दो दिन पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी। ट्रंप ने कहा था कि पीएम मोदी अत्यंत सज्जन व्यक्ति हैं और उन्हें बेहद पसंद हैं।

इस साल फरवरी के महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहली बार भारत दौरे पर आए। अहमदाबाद में हुए नमस्ते ट्रंप में एक लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम ने भारत और अमेरिका समेत दुनिया भर की मीडिया में सुर्खियां बटोरी तो वहीं भारत और अमेरिका की दोस्ती की नई गाथा भी लिख दी। अहमदाबाद में जब मोदी और ट्रंप गले मिल रहे थे तो पूरी दुनिया सांस थामे उनकी बातें सुन रही थी। सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे बड़े सुपरपावर के नेता एक मंच पर एक सुर में बातें कर रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भारत को सच्चा दोस्त बता रहे थे तो पीएम मोदी भी ट्रंप की तारीफ कर रहे थे, दोनों अपने साझा दुश्मन आतंकवाद पर भी चोट कर रहे थे।

पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहतरी की तरफ बढ़ रहे हैं, लेकिन इस रिश्तों को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की दोस्ती ने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया है। नमस्ते ट्रंप इस मायने में भी ऐतिहासक रहा, क्योंकि यहां पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति अपने आधिकारिक दौर पर परिवार के साथ आए और तीन दिनों तक भारत में रहे। अहमदाबाद से आगरा तक की तस्वीरें दोनों दोनों के दोस्ताने की गवाही देता नज़र आया।

सामने वाले नेता के साथ पर्सनल चट बनाना हमेशा से पीएम मोदी का मंत्र रहा है और इसका फायदा देश की नीतियों में भी मिलता है। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरान भी दोनों नेता बार-बार गले मिलते दिखे। नमस्ते ट्रंप की नींव अमेरिका के ह्यूस्टन में पिछले साल सितंबर में हुए हाउडी मोदी कार्यक्रम में ही पड़ चुकी थी। जब पीएम मोदी और ट्रंप ने 50 हजार भारतवंशियों की भीड़ को संबोधित किया था। पीएम मोदी ने यहां भारत के विकस और भविष्ट के साथ आतंकवाद की चुनौतियों पर चर्चा की थी तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता के मुरीद हो गए थे। ट्रंप ने यहां पीएम मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त कहा था।

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