Monday, July 6, 2020

31 मई के बाद खुल जाएंगे मंदिरों के कपाट

कर्नाटक सरकार ने भक्तों और पुजारियों की मांग पर मंदिरों को खोलने का फैसला किया है। 31 मई तक इसको लेकर सारे इंतजाम पूरे हो जाएंगे जबकि 52 मंदिरों में पूजा के लिए आज से ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो जाएगी। मंदिरों की तरह मस्जिद और गिरिजाघर जैसे तमाम धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं के आने पर लगी रोक खत्म हो जाएगी।

नई दिल्‍ली: कोरोना संकट के कारण पिछले दो महीने से बंद कर्नाटक के मंदिरों के कपाट एक जून से आम जनता के लिए खुल जाएंगे। कर्नाटक सरकार ने भक्तों और पुजारियों की मांग पर मंदिरों को खोलने का फैसला किया है। 31 मई तक इसको लेकर सारे इंतजाम पूरे हो जाएंगे जबकि 52 मंदिरों में पूजा के लिए आज से ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो जाएगी। मंदिरों की तरह मस्जिद और गिरिजाघर जैसे तमाम धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं के आने पर लगी रोक खत्म हो जाएगी।

कोरोना वायरस की दहशत के कारण पिछले दो महीने से कर्नाटक के तमाम मंदिरों के कपाट बंद हैं। भक्त भगवान के दर्शन को तरस गए हैं। बंद कपाट पुजारियों को भी कचोट रहा है। हर वक्त श्रद्धालुओं की भीड़ में रहने वाले ये पुजारी लंबे समय से भगवान और भक्त दोनों से दूर हैं और ये दूरी उन्हें बहुत ज्यादा परेशान कर रही है। भगवान के भक्त और पुजारी कर्नाटक सरकार से लगातार ये मांग करते आ रहे थे कि मंदिरों के कपाट जल्द से जल्द खोले जाएं। मंदिरों में पूजा पाठ शुरू करने की इजाजत दी जाए, लेकिन अब कर्नाटक सरकार ने भक्तों की मांग पूरी कर दी है। सरकार ने फैसला किया है कि अगले एक जून से कर्नाटक के तमाम मंदिरों के कपाट खोल दिए जाएंगे। भगवान के दरबार में भक्तों के आने पर लगी रोक हट जाएगी। सबकुछ सही रहा तो अगले एक जून से मंदिरों में फिर से घंटियां बजेंगी, पूजा पाठ और आरती भी होगी।

पहली जून से मंदिरों में पूजा-पाठ तो शुरू हो जाएगा, लेकिन भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरा ख्याल रखना होगा। कर्नाटक सरकार जल्द ही इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी करने वाली है, जिसे भक्तों के साथ पुजारियों को भी मानना पड़ेगा। मंदिर मामलों के मंत्रालय की तरफ से बनाए गए नियमों का पालन हर किसी को करना होगा। मंदिर प्रबंधन को इसे सख्ती से लागू कराना होगा।

उधर, ऐलान हुआ और इधर तैयारियां भी तेज हो गई
कर्नाटक के 52 मंदिरों में पूजा पाठ के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो गई है। हालांकि सरकार को पता है कि जैसे ही मंदिर के कपाट खुलेंगे भक्तों की भारी भीड़ जुट जाएगी, लेकिन कोरोना काल में ये भीड़ भक्तों के साथ सरकार पर भी भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि सरकार ने इसको लेकर जल्द ही गाइडलाइन जारी करने का भी ऐलान कर दिया है। यही नहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी इस मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने एक जून से मंदिरों के कपाट खोले जाने के फैसले से इनकार नहीं किया, लेकिन साथ ही ये भी जोड़ दिया कि वो इस मामले में प्रधानमंत्री के फैसले का इंतज़ार करेंगे।

कर्नाटक में मंदिरों को खोले जाने के ऐलान पर विपक्षी दल भी सरकार से सवाल दाग रहे हैं। विपक्ष ये भी पूछ रहा है कि अगर मंदिर खोले जाएंगे तो फिर चर्च और गिरिजागर क्यों नहीं, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 जून से सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि तमाम धार्मिक स्थल खुल जाएंगे। कोरोना काल में सबसे बड़ा खतरा भीड़ है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि मंदिर खुलने के बाद भी वहां भीड़ जैसा कुछ भी नहीं होगा। भक्त बारी-बारी से आएंगे, तमाम नियमों का पालन करेंगे।

  • शर्तों के साथ खुलेंगे मंदिर
  • मंदिर सिर्फ पूजा और दैनिक संस्कार के लिए खुलेंगे
  • मेला और दूसरे कार्यक्रमों को नहीं मिलेगी इजाजत
  • शर्तों के साथ मंदिर में पूजा पाठ करेंगे श्रद्धालु
  • सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े एसओपी का करना होगा पालन

लॉकडाउन के बाद से भक्त अपने घर में ही पूजा पाठ कर रहे हैं, जिससे मंदिर की दान पेटियां खाली पड़ी हैं। भक्तों के मंदिर से दूर होने के कारण पुजारियों के साथ मंदिर प्रबंधन भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

  • कर्नाटक में करीब 50 हजार मंदिर हैं
  • सरकार ने तीन श्रेणियों ए, बी और सी में बांटा है
  • महीने के 25 लाख रुपए तक के दान वाले मंदिरों को ए श्रेणी में रखा है
  • इस श्रेणी में करीब 210 मंदिर हैं
  • पिछले साल मार्च से मई के बीच इनसे सरकार को करीब 110 करोड़ का रेवेन्यू मिला था
  • इस साल इन तीनों महीनों में इन मंदिरों को कोई दान राशि नहीं मिली है

लॉकडाउन में मंदिरों के कपाट तो खुल जाएंगे। एक जून से भक्तों की सारी रुकावट खत्म हो जाएगी, लेकिन मंदिर प्रबंधन को पता है कि कोरोना काल में भक्त भी काफी एहतियात बरत रहे हैं। लिहाजा जरूरी नहीं कि सारे भक्त मंदिर पहले की तरह बेहिचक मंदिर आ जाएं। यही वजह है कि कर्नाटक सरकार ने भक्तों के हाईटेक दर्शन के भी इंतजाम कर दिए हैं।

लॉकडाउन में हाईटेक दर्शन

  • कर्नाटक में 200 से ज्यादा मंदिरों में ई-पूजा और दर्शन की तैयारी जारी है
  • राज्य के सभी ए श्रेणी के मंदिरों में ये योजना लागू होगी
  • 30 से ज्यादा तरह की पूजा और सेवा ऑनलाइन हो सकेंगी
  • जल चढ़ाने से लेकर महामस्ताभिषेक जैसी सेवाएं शामिल
  • ऑनलाइन बुकिंग और लाइव स्ट्रिमिंग की सुविधा मौजूद

ए ग्रेड के इन मंदिरों में सालाना कम से कम 25 लाख रुपये दान से मिलता है। लेकिन फिलहाल इनके पास दान की राशि न के बराबर है। ऑनलाइन सेवा और पूजा बुक कराने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद भी कुरियर से भेजा जाएगा। भक्तों के घर पर ही प्रसाद पहुंचा दिया जाएगा। मंदिर में होने वाली पूजा और सेवाओं का शुल्क अलग-अलग होगा। पूजा के महत्व और उसकी सामग्री के हिसाब से उनकी राशि तय की जाएगी। इसमें प्रसाद के साथ ही कुरियर के पैसे भी शामिल होंगे। हर मंदिर अपनी सेवा के हिसाब से अलग-अलग फीस तय करेगी और शुल्क की पूरी लिस्ट जारी की जाएगी।

कर्नाटक के 98 प्रतिशत से ज्यादा मंदिर सी श्रेणी के हैं, जिनमें दान की राशि भी कम है। ऐसे सभी मंदिर के अर्चकों और पुजारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छोटे यानी सी ग्रेड के मंदिरों की मांग है कि उन्हें मंदिर चलाने में भारी दिक्कत आ रही है और सरकार को इसके लिए आर्थिक मदद करनी चाहिए।

  • कर्नाटक के 35 हजार 500 मंदिर छोटे सी श्रेणी में आते हैं
  • इन मंदिरों की मुख्य आमदानी दान-दक्षिणा ही होती है
  • लॉकडाउन के कारण दो महीने से सारी आमदनी बंद है
  • मंदिरों के लिए करीब 300 करोड़ से ज्यादा का बजट है
  • लेकिन अधिकांश बजट बड़े मंदिरों पर खर्च हो जाता है
  • सी श्रेणी के मंदिरों को साल में सिर्फ 48 हजार रुपए मिलते हैं
  • कर्मचारी की सैलरी, मेंटेनेंस और रोज के खर्च इससे पूरे नहीं होते

एक तरफ मंदिरों की आमदनी खत्म हो चुकी है तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी है जो अपनी मन्नतों वाली पूजा कराना चाहते हैं। लेकिन लॉकडाउन उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। यही वजह है कि सरकार ने मंदिरों के कपाट खोलने का फैसला किया है।

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