Saturday, July 4, 2020

सुप्रीम कोर्ट का सरकार को फटकार, कहा- आपको केवल एयर इंडिया की चिंता, जनता की नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की उड़ानों में बीच की सीट खाली रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने एयर इंडिया को अगले 10 दिनों तक एयर इंडिया की फ्लाइट में सभी सीटों पर यात्रियों को बैठाने की इजाजत दे दी है।

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की उड़ानों में बीच की सीट खाली रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने एयर इंडिया को अगले 10 दिनों तक एयर इंडिया की फ्लाइट में सभी सीटों पर यात्रियों को बैठाने की इजाजत दे दी है। उसके बाद उसे बांबे हाईकोर्ट के उस आदेश का पालन करना होगा जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि फ्लाइट में बीच की एक सीट खाली छोड़नी होगी।

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि हम नहीं चाहते कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में कोई दखल दें लेकिन सरकार के वकील तुषार मेहता ने ध्यान दिलाया है कि बीच की सीट खाली रखने के हाईकोर्ट के आदेश से उन लोगों को बहुत दिक्कत होगी जिन्होंने पहले से बुकिंग कराया है।

सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी गयी कि बीच की सीट खाली नहीं रखने का फैसला एक्सपर्ट कमिटि की मीटिंग के बाद लिया गया था। यह मीटिंग 4 मई को हुई थी। उन्होंने दलील दी कि फ्लाइट के अंदर जिस तरह से एयर सर्कुलेशन की व्यवस्था होती है, बीच की सीट खाली छोड़ने का कोई फायदा नहीं है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की टोका टोकी से नाराज़ मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको केवल एयर इंडिया की चिंता है, आपको जनता की सेहत की चिंता होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि केंद्र सरकार और एयर इंडिया दोनों के लिए आप ही पेश हो रहे हैं?

सॉलिसिटर जनरल ने जवाब में कहा कि ‘ हाँ माई लार्ड, दोनों का मतलब एक ही है।’ इसपर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा नहीं है। सरकार को सोशल डिस्टेंसिंग की वकालत करनी चाहिए। लेकिन आप तो कंधे से कंधा मिलाकर बैठने की वकालत कर रहे हैं।

गौरतलब है कि शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने एयर इंडिया की फ़्लाइट में बीच की सीट ख़ाली रखने का आदेश दिया था जिसे केंद्र सरकार और एयर इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने एयर इंडिया को डायरेक्टर ऑफ जनरल सिविल एविएशन के सोशल डिस्टेंसिंग सर्कुलेशन का पालन करने के लिए भी कहा था, जिसके लिए बीच की सीटों को इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर खाली रखने की जरूरत थी।

हाईकोर्ट ने यह आदेश एक पायलट देवेन कनानी की याचिका पर सुनाया था। याचिका में आरोप लगाया था कि कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए भारत सरकार ने 23 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाए जाने के दौरान दो यात्रियों के बीच की सीट खाली रखी जाएगी। लेकिन, इसका पालन नहीं किया जा रहा। देवेन कनानी ने सैन फ्रांसिस्को से मुंबई आ रही एक उड़ान की तस्वीर सुबूत के तौर पर अदालत में पेश की थी, जिसमें सभी सीटें भरी हुई हैं।

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