Tuesday, June 2, 2020

बसों के बिल को लेकर मचे बवाल पर सचिन पायलट और परिवहन मंत्री की सफाई

कांग्रेस पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए बसों को लेकर बवाल क्या मचा की अब उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट और राजस्थान के परिवहन मंत्री इस पर बार-बार सफाई देकर हकीकत समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

केजे श्रीवत्‍सन, जयपुर: कांग्रेस द्वारा उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को भेजने को लेकर बसें चलाने के प्रस्ताव को लेकर मचा राजनैतिक घमासान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले राजस्थान बोर्डर से अनुमति नहीं मिलने के बाद बसों को वापस बुलाये जाने और अब राजस्थान सरकार द्वारा 36 लाख रूपये से अधिक का बिल कोटा से बच्चों को भेजने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को भेजे जाने को लेकर बवाल मचा है। राजस्थान सरकार की तरफ से सफाई दी गयी है कि सरकारी बसों को कभी कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश नहीं भेजा था, खुद उत्तर प्रदेश ने ही राजस्थान रोडवेज़ की बसों में डीज़ल भरवाने के एवज में भी 36 लाख रूपये को लेकर पत्र व्यवहार किया था।

कांग्रेस पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए बसों को लेकर बवाल क्या मचा की अब उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और राजस्थान के परिवहन मंत्री इस पर बार-बार सफाई देकर हकीकत समझाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले पर मचे बवाल पर लॉकडाउन के बीच पहली बार मीडिया कांफ्रेंस करने को मजबूर हुए सचिन पायलट ने साफ़ दी कि कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के निर्देश पर प्राईवेट बसों को ही किराए पर लेकर भेजा था। चूंकि योगी सरकार के आरोप कांग्रेस पार्टी को लेकर थे तो बतौर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने साफ़ किया कि सरकारी बसों को भेजने का योगी सरकार का आरोप पूरी तरह से निराधार है। क्योंकि कांग्रेस नेताओं ने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार द्वारा शुरू की गई लोक परिवहन सेवा की प्राईवेट बसों को किराए पर लेकर उत्तरप्रदेश की सीमा पर खड़ी आकर दी थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि यदि मुश्किल वक़्त में कोई भी किसी भी तरह की मदद के लिए आगे आता है तो सरकार को इस पर राजनीति की बजाय स्वीकार कर लोगों को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए।

कोटा से बच्चों को भेजने के एवज में उत्तरप्रदेश सरकार से राजस्थान के 36 लाख रूपये का बिल भेजे जाने के सवाल पर राजस्थान के परिवहन मंत्री खुद जवाब देने आये। उन्होंने साफ़ किया कि दोनों राज्यों की परिवहन निगम की तरह से सामान्य प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त बसों में डीज़ल भरवाने के लिए ही यह राशि खुद उत्तर प्रदेश ने देना कबूल किया था और इसके लिए राजस्थान के कभी अपनी तरफ से कोई पत्र उत्तर प्रदेश सरकार को नहीं लिखा।

वैसे कांग्रेस द्वारा भेजी गयी बसों को फिटनेस और लाईसेंस के नाम पर रोके जाने पर राजस्थान सरकार पहले ही केंद्र के आदेश का हवाल देकर कह चुकी है कि जब 30 जून तक इसकी मियाद ख़त्म हो चुके, इनकी अनिवायर्ता बढ़ा दी गयी है तो आखिरकार इसके आधार पर बसों को रोका जाना अनुचित है। अब कोटा से बच्चों को भेजने के मामले पर भी सरकार ने स्पष्टिकरण दे दिया है, लेकिन जिस तरह से बसों को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है, उससे एक बात साफ़ है कि फिलहाल श्रमिकों को राहत देने के नाम पर किये जा रहे कार्यों को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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