Thursday, July 9, 2020

भूख और बेरोजगारी में मनरेगा का सहारा, दुबई में काम करने वाला भी मिट्टी ढोने को मजबूर

लॉकडाउन के चलते अपने घर राजस्थान में वापस आ रहे लोगों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान लौटे मज़दूरों को अपना घर और परिवार बेशक मिल गया हो, लेकिन लगातार बढ़ते लॉकडाउन ने उनके सामने रोजी रोटी का संकट खडा कर दिया है। अब बाहर से आने वाले लोगों को परिवार के पालन पोषण की चिंता सताने लगी है।

जयपुर: लॉकडाउन के चलते अपने घर राजस्थान में वापस आ रहे लोगों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान लौटे मज़दूरों को अपना घर और परिवार बेशक मिल गया हो, लेकिन लगातार बढ़ते लॉकडाउन ने उनके सामने रोजी रोटी का संकट खडा कर दिया है। अब बाहर से आने वाले लोगों को परिवार के पालन पोषण की चिंता सताने लगी है।

बंद के चलते उन्हें ना रोजगार मिल पा रहा है और ना रोटी।  भूख और बेरोजगारी से बेबस इन लोगों के लिए अब गांवों में चल रहा मनरेगा का कार्य ही इनकी आजीविका के सहारे की आस बना हुआ है। लेकिन विडंबना देखिए की कोटपूतली क्षेत्र के इकत्तीस ग्राम पंचायतों में से केवल अकेली ग्राम पंचायत पनियाला में ही मनरेगा का कार्य चालू है। जबकि हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने घर राजस्थान लौट रहे मज़दूरों की रोजी-रोटी का संकट दूर करने के लिए उन्हें मनरेगा में कार्य देने की बात कही थी। लेकिन मुख्यमंत्री की बात मात्र एक पंचायत तक ही पहुंची।

15 दिन का मिल रहा है काम

कोटपूतली की इस पनियाला ग्राम पंचायत में मनरेगा के दो कार्य चालू है और एक कार्य शुरू होने वाला है। इनको दो ग्रेवल सड़क कार्यो में 120 से 150 लोगो को कार्य मिला हुआ है। सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक मनरेगा में कार्य किया जाता है। आवेदन करने वाले व्यक्ति को ग्राम पंचायत द्वारा 15 दिन का काम दिया जाता है और 220 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। जहां इन कार्यो के लिए अक्सर काम ही आवेदन आते थे, लेकिन लॉकडाउन में मनरेगा में कार्य करने वाले लोगों की मारामारी मची हुई है। क्योंकि होली पर घर आए लोग जो बाहर कमाने जा रहे थे वो और जो बाहर से अब अपने घर पहुंचे है दोनों तरह के लोग लॉकउाउन के भंवर में फंस गए हैं। यहां चल रहा मनरेगा का कार्य ही उनका रोजगार का साधन बना हुआ है।

दुबई में काम करने वाला भी मिट्टी ढोने को मजबूर

इस मनरेगा में अच्छे पढ़े-लिखे लोग भूख और बेरोजगारी के चलते मट्टी डालते दिख रहे है। यहां तक की विदेश दुबई कंस्ट्रक्शन कम्पनी में सुपरवाइजर का कार्य करके अच्छा पैसा कमाने वाला राजेंद्र धानका लॉकडाउन में फंस गया। रोजी-रोटी के लिए अब उसने और उसकी पत्नी ने मनरेगा में काम मांगा है। राजेंद्र की पत्नी को तो इसमें काम मिल गया, लेकिन उसे अब भी काम नहीं मिला है।

वहीं पनियाला निवासी महेश पंजाब में रोड सेफ्टी ठेकेदार है। वो भी यही फंस गया और पैसे ख़त्म होने पर अब उसका परिवार भी मनरेगा में काम मांगा है। महेश और उसकी मां को काम मिल भी गया और दोनों मनरेगा में काम कर रहे है। इसी तरह मनरेगा में काम कर रहे विनोद और रामस्वरूप है, जो बाहर ड्राइवरी का काम करते थे। लेकिन लॉकडाउन ने इन्हें भी बेरोजगार कर दिया अब ये दोनों भी मनरेगा में काम कर रहे है।

मनरेगा में काम कर रही महिलाओ की कहानी भी कुछ इसी तरह की है। मुकेश देवी और बिमला देवी के पति और बेटे लॉकडाउन में बाहर फंसकर बेरोजगार हो गए है। बाहर से पैसे भी नहीं आ रहे तो इनके सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ये महिलाये अब परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी उठाकर मनरेगा में काम कर रही है। मनरेगा में काम कर रही छोटी देवी की एक छोटी सी परचून की दुकान थी। लॉकडाउन के चलते अब वो बंद पड़ी है तो छोटी देवी अब मनरेगा में काम करके परिवार चला रही है।

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