शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा को भाई और पत्नी ने दी मुखाग्नि

केजे श्रीवत्‍सन, जयपुर:

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा एनकाउंटर में शहीद हुए सेना की 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल आशुतोष शर्मा का पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। कर्नल आशुतोष को उनके भाई और पत्नी पल्लवी ने मिलकर मुखाग्नि दी। शहीद को श्रद्दांजलि देने वालों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दक्षिण पश्चिम कमांड के कई अधिकारी शामिल थे।

जब जयपुर के अजमेर रोड स्थित मोक्षधाम में शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा के पार्थिव शरीर को लाया गया तो लोगों ने अपने घरों से बाहर निकलकर गर्मजोशी के साथ हिन्दुस्तान और शहीद जवानों में सम्मान में नारेबाजी करके अपना सम्मान जताया। आतंकवाद से मुकाबला करने और लश्कर के कमांडर को ढेर करने की कर्नल आशुतोष के 21 राष्ट्रीय राइफल्स की कहानियां सभी की जुबां पर थी। यही कारण का कि लोकडाउन के बाद भी लोग इस शहीद को सम्मान देने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे।

मोक्षधाम में पूरे सैनिक सम्मान के साथ कर्नल आशुतोष के पार्थिव शरीर को लाया गया। शव के साथ शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की माताजी, पत्नी पल्लवी और बेटी तमन्ना भी मोक्षधाम पहुंची। इस दौरान अंतिम संस्कार से पहले तिरंगा शहीद की पत्नी को दिया तो वे भावुक हो गईं। उन्होंने इस तिरंगे को बार-बार चूमा। अंतिम संस्कार से पहले भाई पीयूष ने अपनी मां के पैर छुए और कर्नल आशुतोष के शव को चिता पर रखने के साथ ही पहली बार भाई पीयूष भी रो पड़े। कर्नल के भाई पीयूष के साथ मिलकर पल्लवी ने मुखाग्नि दी।

इससे पहले मंगलवार सुबह आर्मी कैंपस स्थित 61 कैवेलरी के ग्राउंड में शर्हिद कर्नल आशुतोष को श्रद्धांजलि दी गई। पुष्पचक्र अर्पित करने वालों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके केबिनेट के 2 मंत्रियों के साथ सेना के तमाम अधिकारी भी थे। यहां सुबह करीब 8.30 बजे पार्थिव देह को 61 कैवलरी के पोलो ग्राउंड में जब लाया गया तो सबसे पहले मां और भाई ने पुष्पचक्र चढ़ाया। जिसके बाद सेना के 10 बड़े अफसरों ने श्रद्धांजलि दी, उसके बाद उनके शव मोक्षधाम के लिए रवाना किया गया।

शहीद कर्नल आशुतोष 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर थे, जो कई मिशन का हिस्सा रहे। सेना ने बताया कि शनिवार को हंदवाड़ा में मुठभेड़ के दौरान कर्नल आशुतोष ने दो आतंकियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में शहीद होने वालों में कर्नल आशुतोष के अलावा, मेजर अनुज, सब इंस्पेक्टर शकील काजी, एक लांस नायक और एक राइफलमैन शामिल हैं। कर्नल आशुतोष को पिछले साल दूसरी बार सेना मेडल मिला था। उन्होंने आखिरी बार 1 मई को अपने पूरे परिवार से बातचीत की थी और पूरे परिवार ने उनकी शहादत को सम्मान देने के लिए आंसू ना बहाने का फैसला भी किया है। शायद यही जज्बा आतंक के खिलाफ एकजुट होकर मुकाबला करने की हर किसी को प्रेरणा भी देगा।

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