Saturday, July 4, 2020

प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, मजदूरों की बदहाली पर सभी सरकारों से मांगा है जवाब

प्रवासी मजदूरों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। देशभर में फंसे मजदूरों की बदहाली का स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और इसके लिए आज तक का वक्त दिया गया था। अब सरकारों के जवाब पर आज कोर्ट में सुनवाई होगी।

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: प्रवासी मजदूरों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। देशभर में फंसे मजदूरों की बदहाली का स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और इसके लिए आज तक का वक्त दिया गया था। अब सरकारों के जवाब पर आज कोर्ट में सुनवाई होगी। वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी मजदूरों की दुर्दशा के मामले में कोर्ट में अपनी दलीलें रखने की अनुमति मांगी है। आज मजदूरों के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट सुरजेवाला की याचिका पर भी विचार कर सकता है।

प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने स्वतः संज्ञा लिया था। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम आर शाह की बेंच ने मीडिया में आ रही खबरों और मज़दूरों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट को लगातार मिल रही चिट्ठियों के आधार पर मामले का संज्ञान लिया। कोर्ट ने केन्द्र सरकार व सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर गुरुवार तक जवाब मांगा है।

प्रवासी मजदूरों की हालत पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा कि अपने घरों को वापस पहुँचने के लिए देश की सड़कों पर पैदल चल रहे मज़दूरों को मदद की सख्त ज़रूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के इंतज़ाम नाकाफी हैं, जिसके लिए सभी सरकारों को जवाब देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ऐसे मजदूरों और उनके परिवार के लोगों को उनके घर तक पहुंचाने तक मुफ्त यात्रा, आश्रय और भोजन की सुविधा प्रदान करने के लिए तत्काल उपाय किए जाने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात को सँभालने के लिए एक समन्वित और केंद्रित कार्रवाई आवश्यक है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट गुरूवार को सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। औरंगाबाद में रेल की पटरी पर कटकर मजदूरों के मौत के मामले में कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जब लोग रेल की पटरी पर सो जाएंगे तो उन्हें कोई कैसे बचा सकता है! कोर्ट की इस टिप्पणी को लोगों ने असंवेदनशील करार दिया था। इसके पहले देश के कई हाइकोर्ट्स ने अप्रवासी मजदूरों के मामले में सरकारों से जवाब मांगा है।

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