Tuesday, June 2, 2020

कोरोना काल में आपके मकान-दुकान-जमीन और बैंक में रखी नकदी पर भी सरकार का कब्जा!

वामपंथियों के एक ग्रुप ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोरोना काल में देश के सभी आम और खास आदमी की निजी प्रॉपर्टी और नकदी पर सरकार को जब्त कर लेना चाहिए।

नई दिल्ली। गनीमत है कि केंद्र की मोदी सरकार वामपंथियों के विचारों से प्रभावित नहीं है, अगर ऐसा होता तो शायद सरकार ने अब तक आपके घर-मकान-दुकान-जमीन और बैंक में रखी नकदी जब्त कर ली होती या फिर जब्त करने की तैयारी में होती। जी, हां कुछ वामपंथी वर्ग के कुछ अर्थशास्त्री, एक्टिविस्टों के एक ग्रुप ने सरकार को सुझाव दिया है कि कोरोना काल में हर खास और आम की निजी संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति और संसाधन घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह 7 सूत्रीय प्रस्ताव मिशन जय हिंद के तहत सरकार को दिया है। वामपंथियों के इस ग्रुप में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, राजमोहन गांधी, अभिजीत सेन, योगेंद्र यादव और अभिजीत सेन सहित 24 अन्य शामिल हैं। इन लोगों का कहना है कि देश के लोगों के पास मौजूद संसाधनों जैसे नकदी, रियल एस्टेट, संपत्ति, बॉन्ड आदि और देश के संसाधनों को इस संकट के दौरान राष्ट्रीय संसाधन माना जाना चाहिए।

वामपंथियों के इस ग्रुप की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारों को लोगों का जीवन पटरी पर लाने के लिए इस कार्य योजना को लागू करना चाहिए। उनकी मांग है कि सरकार को प्रवासियों को 10 दिन के भीतर अपने घर जाने में मदद करनी चाहिए। उन्हें घर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए और ट्रेन तथा बसों का किराया देना चाहिए। राज्य सरकारों को अपने राज्य के भीतर उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन को तत्काल उन्हें भोजन, पानी और आश्रय की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही उन्हें नजदीकी रेल या बस स्टेशन पहुंचाने का भी इंतजाम होना चाहिए।

फ्री चिकित्सा सुविधा

कोरोना के मरीजों, फ्रंटलाइन वर्करों और उनके परिवारों को यूनिवर्सल और मुफ्त हेल्थ केयर सुविधा मिलनी चाहिए। कोरोना के लक्षण वाले सभी मरीजों की मुफ्त जांच होनी चाहिए। मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। फ्रंटलाइन वर्करों और उनके परिवारों को एक साल का मेडिकल और इकनॉमिक कवर मिलना चाहिए।

एक राशनकार्ड पर 10 किलो अनाज

राशनकार्ड में शामिल हर सदस्य को हर महीने 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल, 800 मिली खाद्य तेल, 500 ग्राम चीनी मिलनी चाहिए। राशन कार्ड में अतिरिक्त नाम जोड़े जाने चाहिए या आपात राशन कार्ड मुहैया कराए जाने चाहिए। सबको राशन की सुविधा मिलने तक स्कूलों में लंगर लगाए जाने चाहिए।

 200 दिन काम की गारंटी

शहरी और ग्रामीण इलाकों में जॉब गारंटी बढ़ाई जानी चाहिए। मनरेगा के तहत देश में हर परिवार को साल में 200 दिन काम की गारंटी मिलनी चाहिए। शहरों में हर व्यक्ति को 100 दिन ग्रीन जॉब की गारंटी मिलनी चाहिए और इसके लिए 400 रुपये रोजाना मजदूरी मिलनी चाहिए। मनरेगा कार्ड वाले मजदूर को लॉकडाउन के कारण 30 दिन के काम के नुकसान के लिए मुआवजा मिलना चाहिए।

जॉब से निकाले पर क्षतिपूर्ति

ईपीएफ में पंजीकृत कर्मचारी को नौकरी जाने पर मुआवजा मिलना चाहिए। दबावग्रस्त कंपनियों को ब्याज मुक्त लोन मिलना चाहिए ताकि वे कर्मचारियों को आंशिक वेतन दे सकें। सरकार को उन एसएमएसई कंपनियों का छह महीने का ईपीएफ अंशदान देना चाहिए जो अपने कर्मचारियों को लगातार वेतन दे रही हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों को तीन महीने तक 2000 रुपये की एकमुश्त राशि।

 

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