Wednesday, July 8, 2020

Covid-19 टेस्ट किट की बिक्री में घोर मुनाफाखोरी, दिल्ली हाईकोर्ट को देना पड़ा दखल

एक तरफ जहां कोरोना (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) महामारी और लॉकडाउन (Lockdown) को लेकर देश और दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है, वहीं कुछ कम्पनियां Covid-19 संक्रमण की जांच के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली किट को लेकर मुनाफाखोरी में लगी हैं। यह बात टेस्ट किट के आयात और बिक्री से जुड़े एक मामले विवाद से सामने आई है।

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: एक तरफ जहां कोरोना (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) महामारी और लॉकडाउन (Lockdown) को लेकर देश और दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है, वहीं कुछ कम्पनियां Covid-19 संक्रमण की जांच के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली किट को लेकर मुनाफाखोरी में लगी हैं। यह बात टेस्ट किट के आयात और बिक्री से जुड़े एक मामले विवाद से सामने आई है। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक चीन से भारत आने के बाद इस किट की टोटल कीमत ₹245 प्रति किट पड़ रही है जबकि आयात करने वाली प्राइवेट कम्पनियां इंडियन काउंसिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर को ₹600 की रेट से बेच रही हैं यानी करीब 61 फीसदी मुनाफा कमा रही हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस विवाद में आदेश दिया है कि महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए Covid-19 टेस्ट किट 400 रुपये से ज्यादा के रेट पर नहीं बेची जानी चाहिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए टेस्ट करना बेहद जरूरी है। ऐसे में टेस्ट किट का कम से कम रेट पर बेचा जाना भी उतना ही जरूरी है ताकि न सिर्फ लोगों को बचाया जा सके बल्कि आपातकाल में चिकित्सा संकट का भी सामना किया जा सके।

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश उन तीन निजी कंपनियों को दिया है जिन्होंने 10 लाख टेस्ट किट चीन से भारत लाने का कॉन्ट्रैक्ट किया है। रेयर मेटाबॉलिक्स लाइफ़ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड और आर्क फार्मास्यूटिकल्स की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका लगाई गई थी। इन दोनों कंपनियों ने भारत में Covid-19 टेस्ट किट को भारत में लाने के लिए मैट्रिक्सलैब के साथ समझौता किया था। मैट्रिक्स लैब 7 लाख 24 हजार कोविड-19 टेस्ट किट देने के बाद बाकी की 2 लाख 76 हजार किट तब तक जारी करने से इंकार कर रही थी, जब तक कि उसको पूरा पैसा नहीं मिल जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह पूरा मामला लोगों के जनहित से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां पर मुनाफा कमाने से ज्यादा आम लोगों को सस्ती किट मुहैया कराना ज्यादा जरूरी है। आर्क फार्मास्यूटिकल्स को 7 लाख 24 हजार किट में से पांच लाख किट आईसीएमआर को 600₹ प्रति किट के हिसाब से 30 करोड़ रुपये की कीमत पर देनी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह पूरा मामला लोगों के जनहित से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां पर मुनाफा कमाने से ज्यादा आम लोगों को सस्ती किट मुहैया कराना ज्यादा जरूरी है।

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