श्रमिक एक्सप्रेस विवाद के बीच मजदूरों को रजिस्ट्रेशन का संकट! यहां जानें आवेदन का तरीका और नियम

कुन्दन सिंह, नई दिल्ली: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) संकट औप लॉकडाउन (Lockdown) में देश के विभिन्न हिस्सों पर फंसे प्रवासी मजदूरों पर्यटकों और छात्रों और उनके गृह राज्य में पहुंचाने के लिए चलाई गई श्रमिक एक्सप्रेस (Shramik Special Trains) चलने के साथ ही विवादों में आ गई। वजह किराये से लेकर टिकटों की बिक्री को लेकर। राज्यों के द्वारा किराये के भुगतान करने के आश्वासन के बाद मजदूरों की नई संकट की ई पास यानी यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कब और कहां से कराये। हालांकि इन सब के बीच रेलवे वे साफ कर दिया की यात्रियों की पहचान और उनके गंतव्य का निर्णय राज्य सरकारे करेगी उनसे उनको कोई लेना देना नहीं हैं। ऐसे में लोग कन्फ्यूज हैं कि वो इन ट्रेनों से अपने घर जा सकते हैं या नहीं साथ ही इसके लिए करना क्या होगा।

आईये हम आपको पूरी प्रक्रिया समझाते हैं। सबसे पहले श्रमिक स्पेशल ट्रेन (Shramik Special Trains) से अपने राज्य जाने के लिए लोगो को राज्य के अधिकारियों से या उनके द्वारा जारी किये नंबरो से संपर्क करना होगा, साथ ही राज्यों के द्वारा जारी किये गये वेबसाइट पर अपना डिटेल उपलोड करना होगा। इस काम में कई राज्यों में इस काम में स्थानिय पुलिस भी ई पास जारी कर रही हैं प्रवासी रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले स्थानीय पुलिस प्रशासन से जानकारी हासिल करें। रजिस्ट्रेशन कराएं। आवेदन के बाद संबंधित अधिकारी के पास डेटा तैयार होगा। वे ही लिस्ट तैयार कर बाद में रेलवे को सौंपेंगे, जिसके आधार पर रेल सफर करने की इजाजत दी जाएगी। अगर कोई बगैर आवेदन के या फिर ऐसा कोई व्यक्ति जिसका नाम लिस्ट में नहीं होगा और वह स्टेशन पहुंच जाता है, तब उसे सफर नहीं करने दिया जाएगा। रेलवे ने पहले ही स्पष्ट किया हैं सिर्फ उन्हीं लोगों को ले जाया जा रहा है जिन्हें राज्य सरकारों ने अधिकृत किया है।

श्रमिक एक्सप्रेस के किराये पर रेलवे की सफाई

देशभर में फंसे प्रवासी मजदूरों, छात्रों, श्रद्धालुओं आदि को उनके राज्य वापस भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही है। अब इसे लेकर रेल मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने के लिए निर्धारित गंतव्य के अनुसार राज्य द्वारा दी गई यात्रियों की संख्या के अनुसार ट्रेन टिकट की छपाई की जाएगी। राज्य सरकार ही स्थानीय अधिकारी यात्रियों को टिकट देगा और उनसे किराया इकट्ठा करके रेलवे को देगा। रेलवे ने सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधकों से कहा है कि फंसे हुए लोगों को ले जाने के लिए ट्रेनों की क्षमता के 90 फीसद यात्री होने पर ही विशेष श्रमिक ट्रेनें चलाई जानी चाहिए। ये ट्रेनें राज्य सरकार की मांग के बाद चलाई जाएंगी।

श्रमिक एक्सप्रेस में यात्रा के नियम

रेलवे ने कहना हैं कि जो राज्य सरकार अपने लोगों को उनके गांव पहुंचाना चाहती है वह यात्रियों के टिकट का किराया एकत्र कर और पूरी राशि रेलवे को देकर यात्रा टिकट यात्रियों को सौंपेंगी। इसके साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार संबंधित स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएगी जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि केवल वही यात्री स्टेशन परिसर में प्रवेश कर पाएं जिन्हें यात्रा की मंजूरी दी गई है और जिनके पास यात्रा का वैध टिकट है। रेलवे ने कहा, प्रत्येक श्रमिक स्पेशल ट्रेन का केवल एक गंतव्य होगा और यह बीच में नहीं रुकेगी। 26 डब्बों वाली ट्रेन में यात्री सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए बैठेंगे और बीच वाली सीट पर कोई नहीं बैठेगा।

इस तरह की प्रत्येक ट्रेन लगभग 1,200 यात्रियों को ले जा सकती है। रेलवे राज्य सरकार के द्वारा बताई गई डेस्टिनेशन और यात्रियों की संख्या के हिसाब से टिकट तैयार करेगी और इन्हें स्थानीय स्टेट अथॉरिटी को सौंपा जाएगा। जहां से ट्रेन चलेगी, संबंधित राज्य सरकार उस स्थान पर यात्रियों को भोजन के पैकेट और पेयजल उपलब्ध कराएगी। सभी यात्रियों के लिए चेहरे पर मास्क लगाना अनिवार्य होगा। राज्य के अधिकारी यात्रियों को मास्क इस्तेमाल करने के बारे में निर्देश देंगे। रेलवे ने कहा कि संबंधित राज्य सरकारें यात्रियों को ‘आरोग्य सेतु एप’ डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। बारह घंटे से अधिक के गंतव्य की स्थिति में यात्रियों को एक बार का भोजन रेलवे द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।। डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद राज्य सरकार के अधिकारी यात्रियों की अगवानी करेंगे और उनकी स्क्रीनिंग और जरूरी होने पर आइसोलेशन में भेजेंगे।

आगे की यात्रा से संबंधित सभी प्रबंध भी वही करेंगे। सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधकों को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी चरण में सुरक्षा, संरक्षा और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है तो रेलवे को श्रमिक स्पेशल ट्रेन को रद करने का अधिकार होगा।

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